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रविवार, 17 सितंबर, 2006 को 16:04 GMT तक के समाचार
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'कश्मीर मसले पर बातचीत ही विकल्प'

पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह
नटवर सिंह भारतीय प्रधानमंत्री के पक्ष को सही ठहरा रहे थे
भारत के पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा है कि कश्मीर मसले का समाधान केवल बातचीत के ज़रिए ही निकल सकता है.

उन्होंने कहा कि इसके लिए अगर पाकिस्तान से बातचीत नहीं करेंगे तो फिर किससे करेंगे.

उन्होंने गुटनिरपेक्ष देशों के सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की ओर से जारी किए गए संयुक्त बयान का स्वागत किया.

भारत के पूर्व विदेश मंत्री और गुटनिरपेक्ष देशों के सातवें सम्मेसन के महासचिव रह चुके नटवर सिंह बीबीसी हिंदी के साप्ताहिक कार्यक्रम आपकी बात, बीबीसी के साथ में श्रोताओं और पाठकों के सवालों का जवाब दे रहे थे.

उन्होंने कहा, "कुछ महीनों में इस मसले को 60 वर्ष हो जाएँगे. हमें पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रखनी चाहिए क्योंकि बातचीत के ज़रिए ही समाधान खोजा जा सकता है. बातचीत के अलावा और कोई विकल्प नहीं है."

प्रासंगिकता

 कुछ महीनों में इस मसले को 60 वर्ष हो जाएँगे. हमें पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रखनी चाहिए क्योंकि बातचीत के ज़रिए ही समाधान खोजा जा सकता है. बातचीत के अलावा और कोई विकल्प नहीं है
नटवर सिंह, पूर्व विदेश मंत्री, भारत सरकार

यह पूछे जाने पर कि क्या आज के समय में गुटनिरपेक्ष देशों के सम्मेलन का कोई औचित्य बचा है, उन्होंने कहा कि इसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठाना ग़लत है.

उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में इस बार 118 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और अमरीका सहित दुनिया के कई बड़े देशों की नज़र इस सम्मेलन में लिए गए फ़ैसलों पर रही है.

नटवर सिंह ने कहा कि ऐसा मानना ग़लत है कि अमरीका के वर्चस्व के आगे इस तरह के सम्मेलनों का कोई मतलब नहीं बचा है.

उन्होंने कहा कि आज की परिस्थितियों में अमरीका सहित कोई भी देश गुटनिरपेक्ष देशों या फिर विश्व समुदाय की अनदेखी करके नहीं चल सकता.

नटवर सिंह ने कहा कि इराक़ में अमरीका ने कई दूसरे देशों को साथ लेकर दख़ल दिया पर अभी तक वो अपने मकसद में सफल नहीं हो पाया है. ऐसे में यह कहना कि दुनिया एक ध्रुवीय हो गई है, ग़लत है.

विदेश नीति

पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह
पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह बीबीसी हिंदी के श्रोताओं और पाठकों का जवाब दे रहे थे

भारत की विदेश नीति की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे अमरीका के साथ गहरे संबंध होने चाहिए पर इसका यह मतलब नहीं है कि गुटनिरपेक्ष देशों के समूह में हमारी भूमिका कम हो जाए. भारत के लिए दोनों ही महत्वपूर्ण हैं.

पिछले कुछ समय में भारत की विदेश नीति में आए बदलावों को उन्होंने सही ठहराया.

उन्होंने कहा, "कोई भी विदेश नीति स्थायी और अपरिवर्तनशील नहीं हो सकती. हर चार-पाँच वर्षों में देश-दुनिया की स्थितियाँ बदलती हैं और उनके मुताबिक़ नीतियों में भी परिवर्तन करने पड़ते हैं."

नटवर सिंह गुटनिरपेक्ष देशों के सवाल पर अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों को भी खींचने से नहीं चूके. उन्होंने कहा कि अगर गुटनिरपेक्ष देशों के संगठन पर सवाल उठता है तो सवाल तो नैटो और संयुक्त राष्ट्र पर भी उठ सकता है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चुनाव में भारतीय मूल के शशि थरूर की दावेदारी पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अगर योग्यता के हिसाब से देखा जाए तो शशि थरूर से बड़ा और कोई दावेदार नहीं है पर यहाँ भी ताक़त के आधार पर चीज़ें तय हो सकती हैं.

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