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'सरकार सूचना अधिकार को कमज़ोर कर रही है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रैमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि अगर सरकार सूचना के अधिकार क़ानून में प्रस्तावित संशोधनों को लागू करती है तो इस अधिकार का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा. उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "सरकार ने प्रस्तावित संशोधनों में यह भी तय किया है कि किसी भी मामले में लोगों को तब तक सूचनाएँ नहीं दी जाएँगी जब तक उनपर अंतिम फ़ैसला नहीं ले लिया जाता है. ऐसा करने से तो क़ानून कमज़ोर हो जाएगा." उन्होंने यह बातें बीबीसी हिंदी रेडियो के साप्ताहिक कार्यक्रम आपकी बात बीबीसी के साथ में श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए कही. अरविंद केजरीवाल भारत में सूचना का अधिकार अभियान से जुड़े हैं और दिल्ली में 'परिवर्तन' नाम की एक संस्था चला रहे हैं. अंतिम फ़ैसले के बिना कोई जानकारी न मिलने के प्रस्ताव पर तो उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि इससे लोगों को जानकारी तब मिलेगी जब सुधार की गुंजाइश ख़त्म हो चुकी होगी और लोगों का पैसा ग़लत तरीके से इस्तेमाल हो चुका होगा. उन्होंने कहा, "यह क़ानून सोनिया गांधी की मदद से आया था पर इन प्रस्तावित संशोधनों पर उनकी चुप्पी आश्चर्यचकित करती है. उन्हें इस मामले में हस्तक्षेप करके क़ानून को ख़त्म होने से बचाना चाहिए." अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने एक ओर तो लोगों को ऐसा क़ानून दिया जिसका प्रयोग करके आम नागरिक सरकारी तंत्र में पारदर्शिता तय कर सकें. लेकिन दूसरी ओर फ़ाइल नोटिंग जैसी जानकारियों से लोगों को वंचित किया जा रहा है. अभियान की ज़रूरत उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अभियान की जो ताक़त है उसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्रीय स्तर पर लागू होने के 11 महीने बाद ही सरकार की ओर से प्रस्तावित संशोधनों का लोग विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि इस क़ानून की ताक़त को परखना है तो अधिक से अधिक लोगों तक इसके बारे में जानकारी देनी होगी. हालाँकि उन्होंने माना कि ग्रामीण क्षेत्रों और अशिक्षित लोगों के बीच इस क़ानून के प्रचार-प्रसार की चुनौती तो है ही, सरकार की ओर से इस दिशा में कोई ठोस प्रयास भी नहीं किए गए हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे लोग मौखिक रूप से ही अपने सवाल दर्ज करा सकें और लोगों को सूचनाएँ दी जाएँ. भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफ़ा दे चुके केजरीवाल सरकार पर यह आरोप लगाने से भी नहीं चूके कि सरकार संशोधनों के नाम पर इस क़ानून को पिछले दरवाज़े से वापस लेना चाह रही है. उन्होंने बताया कि इसके ख़िलाफ़ देशभर में सोमवार से विरोध-प्रदर्शनों शुरू किए जाएँगे. | इससे जुड़ी ख़बरें 'सूचना के अधिकार की लड़ाई जारी रहेगी'01 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस अरविंद केजरीवाल को रैमन मैग्सेसे अवार्ड01 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस सूचनाधिकार क़ानून में संशोधन का विरोध27 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस सूचना के अधिकार क़ानून में संशोधन20 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस बहुत महंगी पड़ रही है सूचना19 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'भ्रष्टाचार को सार्वजनिक करना ही मक़सद'11 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भारत में सूचना का अधिकार मिला12 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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