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'भ्रष्टाचार को सार्वजनिक करना ही मक़सद' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पहले केंद्रीय सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला का कहना है कि सूचना का अधिकार लागू करने का मक़सद ही भ्रष्टाचार और घोटालों को सार्वजनिक करना है. 'आपकी बात बीबीसी के साथ' कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि हर वो विभाग या हर वो व्यक्ति जिस पर सरकारी पैसा यानी जनता के टैक्स का पैसा खर्च होता है इस क़ानून के दायरे में आता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्षा विभाग की कुछ जानकारियाँ तो सार्वजनिक नहीं की जा सकेंगी लेकिन रक्षा सौदों से जुड़ी जानकारी इस क़ानून के तहत माँगी जा सकती हैं. हाल ही में पारित सूचना के अधिकार क़ानून के बारे में हबीबुल्ला ने कहा, "क़ानून में पहले ही इसका प्रावधान था लकिन सरकार के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए सूचना का अधिकार क़ानून बनाया गया है." प्रक्रिया श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए सूचना आयुक्त हबीबुल्ला ने बताया कि जिस विभाग के बारे मे सूचना हासिल करनी हो आवेदन उसी विभाग के सूचना अधिकारी को देना होगा. उन्होंने बताया कि आवेदन के साथ जिस दिन सुनिश्चित फ़ीस जमा कर दी जाती है उसके तीस दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध हो जानी चाहिए. उनका कहना था कि इसके बाद यदि सूचना नहीं मिलती है तो राज्यों में नियुक्त किए गए सूचना आयुक्तों से शिकायत की जा सकती है. केंद्रीय सूचना आयुक्त ने बताया कि वे केंद्र सरकार के सभी विभागों के लिए इस तरह की शिकायतें सुनेंगे. एक श्रोता के सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि वैसे तो विश्वास किया जाना चाहिए कि सरकारी महकमों से जो भी जानकारी मिलेगी वह सही होगी और यदि किसी को शक हो कि जानकारी सही नहीं है तो भी वे सूचना आयुक्त के पास शिकायतें दर्ज कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि किसी परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएँ आदि इस क़ानून के तहत हासिल नहीं की जा सकेगी. लेकिन नियुक्ति और तबादले आदि सूचना के अधिकार के तहत आते हैं. एक श्रोता का सवाल था कि क्या मंत्रियों के भ्रष्टाचार, उनके घोटालों, कौड़ियों के मोल ज़मीनों बाँटने और पेट्रोल पंप बाँटने आदि की जानकारी मिल सकेगी? और इसके जवाब में केंद्रीय सूचना आयुक्त हबीबुल्ला ने कहा, "इस क़ानून का मक़सद ही यह जानकारी देना है कि किसी ने पेट्रोल पंप और ज़मीनें किसे और क्यों बाँटीं." रक्षा सौदों की जानकारी क़ानून के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की संप्रभुता, सामरिक रणनीति और दूसरे देशों से रिश्तों के बारे में कोई जानकारी तो इस क़ानून के सहारे हासिल नहीं की जा सकती लेकिन सेना के प्रशासनिक मामलों की जानकारी इससे ज़रूर मिल सकती है. रक्षा सौदों के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "यदि किसी रक्षा सौदे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी हो तो सूचना के अधिकार के तहत इसकी जानकारी माँगी जा सकती है." केंद्रीय सूचना आयुक्त ने कहा कि सार्वजनित क्षेत्र के सभी उद्यम इस क़ानून के दायरे में आते हैं. एक सवाल के जवाब में कहा कि जल्दी ही पंचायतों में कंप्यूटर लग जाएँगे और तब सूचना का अधिकार गाँवों तक पहुँच जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि जानकारियाँ इंटरनेट के माध्यम से भी हासिल की जा सकती हैं. उन्होंने कहा कि केंद्रीय सूचना आयुक्त से http://rti.nic.in/ पर इंटरनेट से संपर्क किया जा सकता है. मुख्य सूचना आयुक्त से व्यक्तिगत रुप से [email protected] पर संपर्क किया जा सकता है. डाक से संपर्क के लिए उनका पता है, Block 4, floor 5, Old JNU Campus, New Delhi -67. | इससे जुड़ी ख़बरें सूचना के अधिकार में संशोधन 02 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भारत में सूचना का अधिकार मिला12 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस सूचना का अधिकार विधेयक संसद में पेश10 मई, 2005 | भारत और पड़ोस 'जनआंदोलनों को राजनीति में आना ही होगा'10 मई, 2004 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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