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सूचना के अधिकार में संशोधन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सूचना के अधिकार संबंधी क़ानून में कुछ संशोधनों की घोषणा की है. भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाया गया यह क़ानून अक्तूबर महीने से लागू किया गया था. प्रधानमंत्री का कहना है कि संशोधन सरकार के कामकाज को और अधिक पारदर्शी बनाने के मक़सद से किए गए हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि कई स्वयंसेवी संगठनों और कार्यकर्ताओं की माँग को देखते हुए यह फ़ैसला किया गया है. केंद्र सरकार ने कहा है कि अगर कोई नागरिक इस क़ानून के तहत माँग करे तो फ़ाइलों पर अधिकारी जो टिप्पणी लिखते हैं उन्हें अब ज़ाहिर किया जाएगा. बीबीसी के दिल्ली स्थित संवाददाता का कहना है कि अफ़सरशाही में इसका काफ़ी विरोध हो रहा था और दलील दी जा रही थी इसकी वजह से अधिकारी ईमानदारी से अपनी राय नहीं दे पाएँगे. लेकिन दूसरे पक्ष का कहना है कि सरकारी फ़ैसले किस आधार पर लिए गए हैं इसका पता देश के लोगों को चलना चाहिए और इससे अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी. सरकार ने इस विवाद में बीच का रास्ता निकाला है, जिसके तहत फ़ाइल पर क्या लिखा गया है यह तो बताया जा सकता है लेकिन उसे लिखने वाले अधिकारी का नाम ज़ाहिर नहीं किया जाएगा. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि आतंरिक सुरक्षा, परमाणु तकनीक और प्रतिरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़े मामलों को इस दायरे से बाहर ही रखा जाएगा. उम्मीद ज़ाहिर की जा रही है कि इस क़ानून की वजह से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार में कमी होगी. क़ानून सूचना देने के लिए आवेदन स्वीकार न करने और 30 दिनों के भीतर सूचनाएँ उपलब्ध न करवाने की स्थिति में 250 रुपए प्रति दिन और अधिकतम 25 हज़ार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है. ग़रीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिए सूचना बिना शुल्क उपलब्ध करवाई जाएगी. इसके लिए हर राज्य में एक सूचना आयोग बनाया जाएगा और एक सूचना आयुक्त की नियुक्ति की जाएगी. इस आयोग में अधिकतम दस सदस्य होंगे. सूचना न मिलने की स्थिति में इस आयोग के समक्ष अपील की जा सकेगी. | इससे जुड़ी ख़बरें सूचना का अधिकार विधेयक संसद में पेश10 मई, 2005 | भारत और पड़ोस भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सीबीआई के छापे30 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस देशभर में सीबीआई के छापे06 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस भ्रष्टाचार से मुक्त सरकार संभव नहीं: गौर26 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस नेपाल में भ्रष्टाचार जाँच के लिए आयोग17 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस 'जनआंदोलनों को राजनीति में आना ही होगा'10 मई, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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