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भ्रष्टाचार से मुक्त सरकार संभव नहीं: गौर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का कहना है कि वे अपनी सरकार को भ्रष्टाचार से मुक्त रखना चाहते हैं लेकिन यह संभव नहीं है. मुख्यमंत्री के रुप में अपनी सरकार का एजेंडा तय कर रहे गौर ने बीबीसी से एक इंटरव्यू में कहा कि वे चुस्त-दुरुस्त सरकार चाहते हैं जिसमें सरकारी दफ़्तरों में जनता के साथ सम्मान का व्यवहार किया जाए. ग़ौरतलब है कि ग़ैर ज़मानती वारंट जारी होने के बाद उमा भारती को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था और बाबूलाल गौर को नया मुख्यमंत्री बनाया गया है. वे पहले ही कह चुके हैं कि उनकी सरकार खड़ाऊ सरकार नहीं होगी और पार्टी के कार्यक्रम के आधार पर चलेगी. हालाँकि उन्होंने यह भी कहा है कि वे उमा भारती के लौटने पर अपना पद छोड़ने के लिए तैयार हैं. प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश - सवाल - आपकी सरकार कैसी होगी? मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर - मेरी इच्छा है कि मेरी सरकार भ्रष्टाचार से मुक्त हो. होना तो संभव नहीं है. लेकिन भ्रष्टाचार जितना कम हो सकेगा कम करने की कोशिश की जाएगी. मैं एक चुस्त दुरुस्त सरकार चाहता हूँ जिसमें जनता चाहे जिस सरकारी दफ़्तर में जाए, चाहे थाना हो, अस्पताल हो, तहसील ऑफ़िस हो या कलेक्टरेट, वहाँ जनता से सम्मान का व्यवहार हो. जनता को अहसास हो कि यह जनता की सरकार है.
सवाल - सबसे पहले आप कौन सा क़दम उठाएँगे? जवाब - मध्यप्रदेश में 70 हज़ार लोग जो मामूली अपराध में बंद हैं उनका मामला निपटाना चाहते हैं. प्रदेश के सभी शहरों को अतिक्रमण से मुक्त करना है. लोगों ने सड़क, फुटपाथ, बग़ीचे और खेल के मैदान पर क़ब्ज़ा कर लिया है. भोपाल की सड़कों पर गाय-बैल बैठे रहते हैं, मुख्य सचिव के कार्यालय के आसपास झुग्गी-झोपड़ियाँ बस गई हैं. मैंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इन सबका हल निकालें. सवाल - क़ानून व्यवस्था कैसे सुधारेंगे? जवाब - भोपाल का उदाहरण लें. भोपाल विकसित शहर बन रहा है. विकसित नगर की अपनी समस्याएँ होती हैं. शहर में गले की चेन खींचने की घटनाएँ बढ़ीं हैं. मैं सख़्ती से पेश आ रहा हूँ. रात में पुलिस की गश्त होगी. हर थाने में शिकायतकर्ता को इज़्ज़त से बिठाकर शिकायत लिखनी चाहिए. केस की विवेचना पुलिस को जल्दी से जल्दी कर लेनी चाहिए. पुलिस को अपराधियों से दूर रहना चाहिए. भूमाफ़िया और सट्टेवालों से पुलिस को दूर रहना चाहिए. सवाल - आपको अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटना कौन सी लगती है? जवाब - मेरे पिता प्रतापगढ़ के पास 10-12 झोपड़ेवाला एक गाँव मोरीपुर नवधी से रोज़ी-रोटी की तलाश में भोपाल आए थे. पिता शराब बनाने वाली मानेक शॉ एंड कंपनी की बैलगाड़ी चलाते थे और शराब के पीपे दुकानों पर पहुँचाते थे. कुछ समय बाद कंपनी ने बरखेड़ी में एक दुकान मेरे पिता को दे दी. 1946 में 16 साल का था और तभी आरएसएस के संपर्क में आया. उन्होंने कहा शराब बेचना अच्छा धंधा नहीं है. 1947 में पिता की मृत्यु के बाद मैंने वह दुकान वापस कर दी. मैं मज़दूरी करता था, कभी छह आने मिलते थे तो कभी आठ आने. सवाल - मज़दूर से मुख्यमंत्री बनने तक की राह में कौन सी घटना ऐसी थी जिसने जीवन का रुख़ बदल दिया? जवाब - देश तभी आज़ाद हुआ था. मज़दूरों को 12 घंटे काम करना पड़ता था. मज़दूरों को लात मारकर भगा दिया जाता था. यूनियन बनाने को बाग़ी होना या गद्दार होना कहा जाता था. मैं पहले लालझंडे की यूनियन में था फिर इंटक में आया. लेकिन वे मालिकों से मिले रहते थे. 1954 में भारतीय मज़दूर संघ की स्थापना हुई. मज़दूरों की दुर्दशा देखकर दुख होता था और तभी मैंने प्रतीज्ञा की थी कि मैं उनकी लड़ाई लड़ूँगा. मज़दूरों की लड़ाई लड़ते-लड़ते क़ानून की पड़ाई की. वकील बना फिर राजनीति में आया. वह मज़दूरों को न्याय दिलाने की इच्छा ही थी जिसकी वजह से मैं आज मुख्यमंत्री के पद तक पहुँचा हूँ. |
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