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उमा 14 दिन की न्यायिक हिरासत में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हुबली की एक अदालत ने भारतीय जनता पार्टी की नेता नेता उमा भारती को 10 साल पहले भड़के दंगों के एक मामले में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है. उमा भारती बुधवार को कर्नाटक के शहर हुबली पहुँचीं जहाँ उनके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट निकला था. अपने समर्थकों की भीड़ लेकर हुबली पहुँचने के बाद उन्होंने स्थानीय अदालत में समर्पण किया. उन्होंने ज़मानत के लिए कोई अर्जी नहीं दी. संभावना है कि उमा भारती को हुबली में किसी गेस्ट हाउस में न्यायिक हिरासत में रखा जाएगा. वारंट की वजह से ही दो दिन पहले उमा भारती ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. उनकी जगह पर बाबूलाल गौर को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाया गया है. भोपाल में इस्तीफ़ा देने के बाद उमा भारती रेलगाड़ी से महाराष्ट्र के रास्ते होते हुए हुबली पहुँचीं. कर्नाटक के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अनंत कुमार और पार्टी नेता शाहनवाज़ हुसैन भी उनके साथ हुबली पहुँचे. राजनीति उमा भारती मामले ने पिछले कुछ दिनों से भारत में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है. भाजपा इस मुद्दे पर राजनीतिक आँदोलन शुरू करना चाहती है. मगर सत्ताधारी दल कांग्रेस ने भाजपा की इस रणनीति की निंदा की है और कहा है कि उमा भारती का मामला आपराधिक है जबकि भाजपा इसे उमा भारती की शहादत की तरह पेश कर रही है. उमा भारती मामले पर इस सप्ताह संसद में भी बड़ा हंगामा हुआ. विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने आपराधिक मामलों में फंसे मंत्रियों को हटाने की माँग करते हुए संसद के दोनों सदनों में विरोध किया जिसके कारण वहाँ सोमवार और मंगलवार को कोई काम नहीं हो पाया. उमा भारती के ख़िलाफ़ वारंट 1994 के एक मामले में जारी हुए हैं. उन्होंने तब हुबली में एक विवादित ईदगाह में कर्फ्यू के बावजूद जाकर तिरंगा झंडा फ़हराया था. इसके बाद वहाँ दंगे भड़क उठे थे जिसमें अनेक लोग मारे गए थे. |
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