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उमा भारती की जगह गौर मुख्यमंत्री | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्यप्रदेश में बाबूलाल गौर ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. राज्यपाल बलराम जाखड़ ने केवल बाबूलाल को ही पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. उनकी मंत्रिपरिषद का विस्तार बाद में होगा. इससे पहले सोमवार को भारतीय जनता पार्टी संसदीय बोर्ड ने उमा भारती का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया और उमा भारती ने अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल बलराम जाखड़ को सौंप दिया. पूरे मामले पर पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी बहुत उत्तेजित नज़र आए और उनका कहना था कि अब यूपीए मंत्रियों की बारी है. उनका कहना था, "केंद्र सरकार में शामिल उन सभी मंत्रियों को गिरफ़्तार किया जाना चाहिए जिनके ख़िलाफ़ वारंट जारी हैं." इसके बाद भोपाल में भाजपा विधायक दल की बैठक में उमा भारती सरकार में गृह मंत्री रहे गौर को विधायक दल का नया नेता चुन लिया गया. दिल्ली में सोमवार को भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में उमा भारती के इस्तीफ़े पर विचार किया गया जिसके बाद पार्टी अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने फ़ैसले की जानकारी दी. वेंकैया नायडू ने कहा,"उमा भारती जी ने इस्तीफ़ा देने की इच्छा व्यक्त की और इसके लिए पार्टी की अनुमति माँगी और हमने उनको अनुमति दे दी". उमा भारती ने कर्नाटक के हुबली शहर में 10 साल पहले हुए सांप्रदायिक दंगे के एक मामले में वारंट जारी होने के बाद वेंकैया नायडू को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया था. उधर कर्नाटक पुलिस की एक टीम वारंट लेकर सोमवार को भोपाल पहुँच रही है. संसद में हंगामा इस बीच उमा भारती के मामले पर संसद में सोमवार को हंगामा हुआ जिसके कारण दोनों ही सदनों में कोई काम नहीं हो सका. कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा शुरू हो गया जिसके कारण पहले दोनों सदनों की कार्यवाही को दो बजे तक के लिए स्थगित किया गया.
बाद में फिर हंगामा होता रहा जिसके बाद कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई. उत्तराधिकारी का चयन सोमवार दोपहर भोपाल में भारतीय जनता पार्टी विधायक दल की बैठक में नए नेता का चुनाव किया गया. पार्टी नेतृत्व ने इस बैठक में भाग लेने के लिए मध्यप्रदेश के पार्टी प्रभारी अरूण जेटली, मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष कैलाश जोशी और पार्टी महासचिव शिवराज सिंह चौहान को भोपाल भेजा. हालाँकि उमा भारती के उत्तराधिकारी के नाम पर काफ़ी अटकलें लगाई जा रही थीं. राज्य के गृहमंत्री बाबूलाल गौर के अलावा मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेताओं कैलाश जोशी, शिवराज सिंह चौहान और सुमित्रा महाजन का नाम पर भी अटकलें लग रही थीं. याचिका ख़ारिज़ सोमवार को ही हुबली में एक अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री एस एम कृष्णा की सरकार की ओर से उमा भारती मामले में दायर की गई एक याचिका ख़ारिज़ कर दी. याचिका में उमा भारती के ख़िलाफ़ दायर मामले को वापस लेने का अनुरोध किया गया था. उमा भारती पर 1994 में ये मामला ईदगाह मैदान में कर्फ़्यू का उल्लंघन कर प्रवेश करने और वहाँ राष्ट्रीय झंडा फ़हराने के कारण दर्ज किया गया था. अब न्यायाधीश ने इस मामले को एक बार फिर प्रथम श्रेणी न्यायिक मैजिस्ट्रेट के पास भेज दिया है. अदालत के इस आदेश का मतलब ये है कि उमा भारती के विरूद्ध निकला गिरफ़्तारी का ग़ैर ज़मानती वारंट जारी रहेगा. मामला कर्नाटक में हुबली की एक अदालत ने दंगा भड़काने के 10 साल पुराने एक मामले में उमा भारती के ख़िलाफ़ पिछले दिनों वारंट जारी किया था. 1994 में उमा के ख़िलाफ़ हत्या के प्रयास के एक मामले समेत कुल 13 मामले दायर किए गए थे, जब उन्होंने हुबली के ईदगाह मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के एक अभियान में भाग लिया था. इस मैदान पर हिंदू और मुसलमान दोनों समुदाय के लोग अपना अधिकार जताते हैं. ईदगाह प्रबंधन ने उस साल स्वतंत्रता दिवस के दौरान मैदान पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर रोक लगा रखी थी. इसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी ने वहाँ ज़बरदस्ती तिरंगा फहराने का फ़ैसला किया था. भाजपा के हज़ारों कार्यकर्ता हुबली पहुँचे थे. इस दौरान हुई हिंसा में कई लोगों की मौत हुई थी. वर्ष 2002 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ठोस सबूतों के अभाव में उमा के ख़िलाफ़ सारे मामले वापस लेने का निर्णय किया था. सिर्फ़ एक मामला तकनीकी कारणों से जारी रह गया था, जो कि हत्या के प्रयास का मामला है. |
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