|
भारती ने पार्टी अध्यक्ष को इस्तीफ़ा सौंपा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक पुराने मामले में ग़ैर ज़मानती वारंट की ख़बरों के बाद मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री उमा भारती ने भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष वेंकैया नायडू को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है. पार्टी नेता सुषमा स्वराज के अनुसार पार्टी सोमवार को इस मामले पर विचार करेगी. शुक्रवार को यह मामला सामने आने के बाद कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल ने उनके इस्तीफ़े की माँग की थी. वैसे तकनीकी रुप से उमा भारती के इस्तीफ़े का कोई अर्थ नहीं हैं क्योंकि मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के लिए उन्हें अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल को भेजना होगा. उल्लेखनीय है कि ऐसे ही एक पुराने मामले में ग़ैर ज़मानती वारंट के बाद केंद्रीय मंत्री शिबू सोरेन के इस्तीफ़े को लेकर भाजपा ने बहुत हंगामा किया था और कई दिनों तक संसद की बैठक नहीं चलने दी थी. आख़िर शिबू सोरेन को इस्तीफ़ा देना पड़ा था. दिल्ली से भोपाल लौटने के बाद उन्होंने पत्रकारों को बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी से मुलाक़ात के बाद यह फ़ैसला किया. उन्होंने कहा, "मैने दोपहर साढ़े तीन बजे अपना इस्तीफ़ा वेंकैया नायडू को सौंपा और उनसे अनुरोध किया कि वे इसे स्वीकार कर लें." उनका कहना था कि इस समय उनका इस्तीफ़ा आवश्यक है. मामला उमा भारती का मामला दस साल पुराना है और हुबली की एक अदालत में चल रहा है. दस साल पहले एक आंदोलन के सिलसिले में यह मामला दर्ज किया गया था. हालांकि इस आंदोलन से जुड़े आठ मामले तो सरकार वापस ले चुकी है लेकिन उमा भारती और 21 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ दो मामले अभी भी अदालत में हैं. इस मामले में अदालत पिछले सालों में उमा भारती, जगदीश शेट्टीगार और अन्य लोगों के ख़िलाफ़ कई बार ग़ैर ज़मानती वारंट जारी कर चुकी है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||