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क्या है उमा भारती का मामला ? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कर्नाटक के हुबली शहर की एक अदालत ने 21 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी नेता उमा भारती के ख़िलाफ़ दंगा भड़काने के 10 साल पुराने एक मामले में ग़ैर ज़मानती वारंट जारी किया है. उमा भारती ने 1994 में स्वाधीनता दिवस के समय कर्नाटक में एक आँदोलन का नेतृत्व करते हुए हुबली की ईदगाह मैदान में राष्ट्रीय झंडा फ़हराया. उस वक़्त दिल्ली में नरसिम्हा राव और कर्नाटक में एस एम कृष्णा की सरकार थी. इस मैदान पर हिंदू और मुसलमान दोनों समुदाय के लोग अपना अधिकार जताते हैं. ईदगाह प्रबंधन ने उस साल स्वतंत्रता दिवस के दौरान मैदान पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर रोक लगा रखी थी. मगर भारतीय जनता पार्टी ने वहाँ ज़बरदस्ती तिरंगा फहराने का फ़ैसला किया जिसके बाद उनके हज़ारों कार्यकर्ता हुबली पहुँचे. इस दौरान हिंसा भड़क उठी और 10 लोगों की मौत हुई. इस घटना के बाद उमा भारती और 21 अन्य लोगों के विरूद्ध एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया. वर्ष 2002 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ठोस सबूतों के अभाव में उमा के ख़िलाफ़ सारे मामले वापस लेने का निर्णय किया और अदालत में इसके लिए आवेदन किया. अदालत ने सभी मामले वापस ले लिए मगर धारा 307 के तहत दर्ज हत्या के प्रयास का एक मामला रह गया था. इस वर्ष दो महीने पहले ही कर्नाटक सरकार ने उमा भारती के ख़िलाफ़ लगे इस मामले को वापस लेने के लिए हुबली की ज़िला और सत्र न्यायालय में एक पुनर्विचार याचिका दायर की थी. मगर सोमवार 23 अगस्त को अदालत ने ये याचिका ख़ारिज़ कर दी. न्यायाधीश ने इस मामले को एक बार फिर प्रथम श्रेणी न्यायिक मैजिस्ट्रेट के पास भेज दिया है. अदालत के इस आदेश का मतलब ये है कि उमा भारती के विरूद्ध निकला गिरफ़्तारी का ग़ैर ज़मानती वारंट जारी रहेगा. |
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