| नेपाल में भ्रष्टाचार जाँच के लिए आयोग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के नरेश ज्ञानेंद्र ने भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच करने और उनमें दोषी पाए जाने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई के लिए एक ताक़तवर पैनल बनाया है. शाही महल के एक बयान में कहा गया है कि यह शाही आयोग उस तमाम संपत्ति को ज़ब्त करके उसे सरकारी ख़ज़ाने में डाल देगा जो तस्करी और अधिकारों का दुरुपयोग करके कमाई गई होगी. ग़ौरतलब है कि नरेश ज्ञानेंद्र ने क़रीब एक पखवाड़ा पहले सरकार को यह कहते हुए बर्ख़ास्त कर दिया था कि वह माओवादी विद्रोहियों से निपटने में नाकाम रही है और सत्ता अपने हाथों में ले ली थी. उस वक़्त ज्ञानेंद्र ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही थी. रिश्वतख़ोरी और भाई-भतीजावाद के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई का वादा किया गया था. अब छह सदस्यों का यह शाही आयोग बनाया गया है जिसके अध्यक्ष जाने-माने नौकरशाह भक्त बहादुर कोइराला होंगे और इसे एक न्यायालय के अधिकार हासिल होंगे. शाही महल के बयान में कहा गया है कि जो भी इस आयोग के आदेशों की अवहेलना करेगा उस पर डेढ़ सौ डॉलर तक का जुर्माना और छह महीने तक की जेल हो सकती है. 'दुर्भावना नहीं' आयोग के अध्यक्ष भक्त बहादुर कोइराला ने इन ख़बरों का खंडन किया है कि आयोग राजनीतिक दुर्भावना के साथ काम करेगा.
उन्होंने बीबीसी से कहा कि किसी के भी ख़िलाफ़ किसी भी दुर्भावना से काम नहीं किया जाएगा. कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ इस आयोग के गठन का स्वागत किया गया है. राजधानी काठमांडू में एक विश्वविद्यालय छात्र संजय अर्याल ने समाचार एजेंसी एपी से कहा, "अब सही वक़्त है कि भ्रष्ट नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो जो ख़ुद तो मोटे होते जा रहे हैं जबकि देश हर दिन ग़रीबी की तरफ़ बढ़ रहा है." "अगर यह आयोग काम करने में नाकाम रहता है तो भ्रष्टाचार से कभी छुटकारा नहीं मिल सकता." लेकिन एक कर कार्यालय में काम करने वाले श्रीराम श्रेष्ठ कुछ सशंकित नज़र आते हैं. वह कहते हैं, "पहले भी बहुत से आयोग बनाए गए और उन्होंने सिर्फ़ रिपोर्टें तैयार करने के सिवाय कुछ नहीं किया, रिपोर्टों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई." |
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