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मंगलवार, 15 फ़रवरी, 2005 को 09:26 GMT तक के समाचार
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नेपाल ने आलोचना को ख़ारिज किया
दिल्ली में नेपालियों का प्रदर्शन
इन छह देशों ने नेपाल में ताज़ा राजनीतिक गतिविधियों का कड़ा विरोध किया था
नेपाल ने देश में आपातकाल लागू किए जाने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई आलोचना को ख़ारिज किया है.

नवनियुक्त उप प्रधानमंत्री तुलसी गिरी ने रॉएटर्स से कहा है कि देश में माओवादी हिंसा के चलते अराजकता को फैलने से रोकने के लिए आपातकाल लागू करना ज़रूरी था.

उनका कहना था कि देश में क़ानून व्यवस्था कि स्थिति बहुत ख़राब है.

उन्होंने ये भी कहा कि यदि माओवादी बातचीत के लिए आगे नहीं आते तो सरकार के पास उनका पीछा करने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा.

उधर भारत समेत छह देशों ने नेपाल से अपने राजनयिकों को नेपाल की राजनीतिक गतिविधियों पर चर्चा के लिए वापस बुला लिया है.

राजदूत वापस

नरेश ज्ञानेंद्र के सत्ता अपने हाथ में लेने का इन देशों ने कड़ा विरोध किया था.

नेपाल में अमरीका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ़्रांस के राजदूत अपने-अपने देश वापस चले गए हैं.

डेनमार्क के राजदूत को भी वापस बुलाया गया है.

काठमांडू में भारतीय दूतावास के अधिकारियों का कहना था कि भारत के राजदूत शिव शंकर मुखर्जी दिल्ली में उच्च अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं.

भारत ने नेपाल में उठाए गए कदमों का कड़ा विरोध किया था और उनकी आलोचना भी की थी.

भारत कह चुका है कि वह नेपाल में बहुदलीय लोकतंत्र और संवैधानिक राजशाही का समर्थन करता है.

अमरीकी सरकार के बुलावे पर अमरीकी राजदूत जेम्स मोरिआर्टी वॉशिंगटन चले गए हैं.

अमरीका ने भी नेपाल में हाल की राजनीतिक गतिविधियों पर चिंता जताई है और कहा है कि राजनीतिक दलों को स्वतंत्रता से काम करने दिया जाए.

डेनमार्क के राजदूत गर्ट मैनेके का कहना था कि उनकी सरकार ने फ़िलहाल नेपाल को दी जाने वाली सहायता पर रोक लगा दी है.

नेपाल का बजट काफ़ी हद तक विदेशी सहायता पर निर्भर है.

जिन सरकारों ने नेपाल की गतिविधियों को उनका आंतरिक मामला बताया है उनमें चीन, पाकिस्तान और रूस शामिल हैं.

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