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भारत के फ़ैसले से बांग्लादेश, पाक नाराज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण एशियाई सहयोग संगठन (सार्क) की शिखर बैठक में भारत के भाग न लेने के फ़ैसले पर बांग्लादेश और पाकिस्तान ने तीख़ी प्रतिक्रिया जताई है. बांग्लादेश के विदेश सचिव शमशेर मोबिन चौधरी ने इसे अचानक लिया गया दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय बताया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मसूद ख़ान ने भारत के फ़ैसले को अत्यंत निराशाजनक बताया है. इससे पहले भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सार्क शिखर बैठक में भाग नहीं लेने के फ़ैसले से शिखर सम्मेलन एक बार फिर स्थगित करना पड़ा. भारत के विदेश सचिव श्याम सरन का कहना था, "भारत ने अपने पड़ोसी देश की स्थिति देखते हुए सार्क बैठक में हिस्सा नहीं लेने का फ़ैसला किया है. हमने बांग्लादेश को इसकी सूचना दे दी है और उनसे नई तारीखें तय करने के लिए कहा है." हाल में भारत के पड़ोसी देश नेपाल में नरेश ज्ञानेंद्र के सरकार बर्ख़ास्त करने के फ़ैसले की भारत ने कड़ी आलोचना की थी. सार्क के संविधान के अनुसार अगर किसी भी सदस्य देश का प्रमुख बैठक में हिस्सा नहीं लेता तो बैठक का आयोजन नहीं किया जा सकता. तीख़ी प्रतिक्रिया, निराशा बांग्लादेश के विदेश सचिव मोबिन चौधरी ने कहा कि बांग्लादेश की सरकार वहाँ पर सुरक्षा स्थिति पर भारत की टिप्पणी को सिरे से ख़ारिज करती है. उनका कहना था कि भारत की टीम जो बांग्लादेश में सुरक्षा स्थिति का जायज़ा लेने वहाँ पहुँची है वो अब भी ढाका में ही है. उन्होंने कहा, "इस टीम ने कभी नहीं कहा कि वह सुरक्षा स्थिति से संतुष्ट नहीं है. सार्क को राजनीतिक और द्विपक्षीय मुद्दों नहीं जकड़ना चाहिए." उनका कहना था, "सार्क बैठक को स्थगित करना सार्क की भावना के विरुध है क्योंकि सार्क का चार्टर स्पष्ट तौर पर कहता है कि द्विपक्षीय राजनीतिक और विवादास्पद मुद्दे इसके अधिकारक्षेत्र से बाहर हैं." उधर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मसूद ख़ान का कहना था, "दो कारण दिए गए हैं. एक कारण तो नेपाल बताया गया है और दूसरा भारतीय नेता की सुरक्षा." उनका कहना था, "बांग्लादेश की सरकार ने सब प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया है कि सुरक्षा के पूरे इंतज़ाम किए गए हैं. बांग्लादेश में इससे भारी निराशा है क्योंकि उन्होंने पूरी तैयारी कर ली थी और प्रतिनिधि ढाका पहुँचने शुरु हो गए थे." |
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