|
'बुनियादी सवालों पर कोई समझौता नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के विदेश मंत्री नटवर सिंह का कहना है कि जम्मू कश्मीर की सच्चाइयों और बुनियादी सवालों पर समझौता नहीं किया जा सकता. उनका कहना था, "जम्मू कश्मीर भारत के लिए कुछ वर्ग किलोमीटर का ज़मीन का टुकड़ा भर नहीं है, वह भारत की धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक है." बीबीसी हिंदी के साप्ताहिक कार्यक्रम - 'आपकी बात बीबीसी के साथ' में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता का सवाल एक पेचीदा मामला है और इस पर बहुत काम किया जाना है. उनका कहना था कि भारत की जनता भी यह स्वीकार नहीं करेगी कि भारत को बिना वीटो पॉवर के दोयम दर्जे की सदस्यता दे दी जाए. भारत-पाक रिश्ते विदेश मंत्री नटवर सिंह से पूछा गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कहा जाता है कि जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर भारत का रवैया लचीला नहीं है तो उन्होंने कहा कि भारत जम्मू कश्मीर की सच्चाइयों और बुनियादी सवालों पर कोई समझौता नहीं कर सकता. उनका कहना था, "जम्मू कश्मीर भारत के लिए धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक भी है. हमें फ़ख़्र है कि भारत में एक ऐसा राज्य भी है जहाँ मुसलमान बहुसंख्यक हैं और जहाँ ज़्यादातर मंत्री, विधायक और मुख्यमंत्री मुस्लिम हैं." भारत और पाकिस्तान बातचीत के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि बातचीत ठीक रास्ते पर चल रही है लेकिन वे नहीं कह सकते कि सब ठीक है, समस्याएँ हल हो गई हैं और जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर कोई बड़ा हल निकल आया है.
उन्होंने कहा, "कुछ मुद्दों पर आगे बढ़े हैं और कुछ मुद्दों पर आगे नहीं भी बढ़े हैं." सार्क देशों के बारे में उनका कहना था कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध अच्छे नहीं चल रहे होते तो सार्क का मामला भी ठीक नहीं चलता. नटवर सिंह का कहना था कि फ़िलहाल दोनों देशों के संबंध अच्छे हैं इसलिए सार्क में बात अच्छी होगी. स्थाई सदस्यता संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता पर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह एक बहुत पेचीदा मामला है और इसके लिए बहुत काम करना होगा. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में बदलाव से लेकर कम जगह के लिए बहुत से उम्मीदवार होने का ज़िक्र किया. उन्होंने वीटो पॉवर के साथ सुरक्षा परिषद के लिए भारत की सदस्यता के दावे को तर्कसंगत ठहराते हुए कहा कि भारत दुनिया भर में शांति सैनिक भेजता रहा है और वह निरस्त्रीकरण का समर्थन करता है. विदेश मंत्री ने कहा, "भारत पूरे अधिकार के साथ ही सुरक्षा परिषद में जाना चाहेगा, वैसे भी भारत की जनता को यह मंज़ूर नहीं होगा कि भारत को सुरक्षा परिषद में बी ग्रेड का सदस्य बना दिया जाए." उन्होंने इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन की उम्मीद ज़ाहिर की. सूनामी सहायता नटवर सिंह ने इस बात से इनकार किया कि अपने आपको महाशक्ति के रुप में स्थापित करने की दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय सहायता लेने से इनकार किया. उन्होंने कहा, "हम सिर्फ़ यह मिसाल देना चाहते थे कि भारत एक शांतिपूर्ण देश है जो बहुपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देना चाहता है." उनका तर्क था, "भारत को भूकंप, बाढ़ और सूखा जैसी विपदाओँ से जूझने का पर्याप्त अनुभव है और हमें लगा कि हम बिना किसी सहायता के यह सब कर सकते हैं." उनका कहना था कि भारत ने जिस तत्परता से इंडोनेशिया, मलेशिया, श्रीलंका और मालदीव को सहायता भेजी उसकी सराहना की जा रही है. विदेश नीति देश की विदेश नीति के बारे में विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा कि इसमें आमतौर पर कोई बदलाव नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि न मोरारजी देसाई की सरकार, न देवेगौड़ा और गुजराल की सरकार और न वाजपेयी की सरकार उस नीति में बड़ी तब्दीली कर पाई जो कांग्रेस की सरकार ने बनाई थी. उन्होंने कहा कि आमतौर पर एक बार को छोड़कर भारत की विदेश नीति आम सहमति पर चलती रही है. नटवर सिंह ने कहा कि पोखरण परमाणु परीक्षण के अलावा किसी नीति पर सवाल नहीं उठाए गए हैं. उन्होंने कहा कि फ़लस्तीन के मुद्दे पर भारत की नीति यथावत है और उसकी पूरी सहानुभूति फ़लस्तीनी जनता के साथ है. हालाँकि भारत इसराइल से भी अपने संबंध अच्छे बनाए रखेगा. इराक़ के बारे में उनका कहना था कि जनता वहाँ उम्मीद कर रही है कि चुनाव के बाद सेनाएँ इराक़ छोड़ देंगी और सत्ता इराक़ी जनता के हाथों में होगी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||