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बुधवार, 22 सितंबर, 2004 को 16:53 GMT तक के समाचार
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'भारत-पाकिस्तान मसले सुलझा सकते हैं'
परवेज़ मुशर्रफ़
परवेज़ मुशर्रफ़ ने मनमोहन सिंह से होने वाली मुलाक़ात का भी ज़िक्र किया
संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने विश्वास व्यक्त किया है कि भारत और पाकिस्तान कश्मीर सहित सभी आपसी विवादों को बातचीत से सुलझा सकते हैं.

सफ़ेद शेरवानी पहनकर संयुक्त राष्ट्र महासभा में पहुँचे परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा, "मेरा मानना है कि विवाद भारत और पाकिस्तान सुलझा सकते हैं, कश्मीर का भी. लड़ाइयों से साबित हो चुका है कि वह समस्या का हल नहीं है, पाकिस्तान और भारत की जनता शांति चाहती है."

 संबंध सामान्य बनाने की दिशा मे सौहार्द के साथ आगे बढ़ रहे हैं, मैं उम्मीद करता हूँ कि भारत भी पाकिस्तान की तरह ही गंभीरता और ईमानदारी दिखाएगा
परवेज़ मुशर्रफ़

उन्होंने कहा, "दक्षिण एशिया के गरीब लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए भारत और पाकिस्तान को शांति की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए. दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने संबंधी क़दम उठाए जाने चाहिए, हम हर समस्या का शांतिपूर्ण हल चाहते हैं."

पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने कहा, "अब हम संबंध सामान्य बनाने की दिशा मे सौहार्द के साथ आगे बढ़ रहे हैं, मैं उम्मीद करता हूँ कि भारत भी पाकिस्तान की तरह ही गंभीरता और ईमानदारी दिखाएगा."

उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री के साथ मुलाक़ात के बारे में कहा, "मैं भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ मुलाक़ात का इंतज़ार कर रहा हूँ ताकि सकारात्मक बातचीत हो सके."

चिंताएँ

पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने अपने भाषण भारत के साथ संबंधों के अलावा आतंकवाद की समस्या और आर्थिक ग़ैर-बराबरी के मुद्दे पर भी ज़ोर दिया.

उन्होंने कहा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष के मामले में पाकिस्तान ने अग्रणी भूमिका निभाई है और वह आतंकवाद की समस्या को जड़ से ख़त्म करना चाहता है.

 हम आतंकवाद के ख़िलाफ लड़ाई जीत रहे हैं, लेकिन हम जितना कुछ कर रहे हैं वह काफ़ी नहीं है. आतंकवाद के असली कारण को ठीक करना होगा.
परवेज़ मुशर्रफ़

उन्होंने कहा, "हम आतंकवाद के ख़िलाफ लड़ाई जीत रहे हैं, लेकिन हम जितना कुछ कर रहे हैं वह काफ़ी नहीं है. आतंकवाद के असली कारण को ठीक करना होगा. आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए उसके कारण को ख़त्म करने की दिशा में दीर्घकालिक प्रयत्न होना चाहिए."

अंतरराष्ट्रीय मामलों में उन्होंने मध्य पूर्व और इराक़ की चर्चा भी की.

उन्होंने कहा, "फ़लस्तीन की समस्या हर मुसलमान के लिए एक बहता हुआ घाव है, उसे ठीक करना चाहिए. फ़लस्तीनियों के अधिकार उन्हें मिलने चाहिए, इसराइल को फलस्तीनी ज़मीन पर दीवार खड़ी करने का कोई अधिकार नहीं है."

इराक़ के बारे में उन्होंने कहा कि वहाँ की जनता को अपने जीवन को संभालने का मौक़ा मिलना चाहिए और इस्लामी देशों को इराक़ की मदद करने के लिए आगे आना चाहिए.

अफ़ग़ानिस्तान में होने वाले चुनावों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चुनाव का समर्थन करता है और वहाँ मौजूद आतंकवादियों को रोकने का भरसक प्रयत्न करेगा.

इसके अलावा उन्होंने कहा कि तालेबान को पाकिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल नहीं करने दिया जाएगा.

आर्थिक मामलों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि "दुनिया में गरीबों की हालत लगातार ख़राब होती जा रही है और सिर्फ़ कुछ देशों में शांति और समृद्धि से काम नहीं चलेगा, हर जगह शांति लानी होगी और उसके लिए गैरबराबरी और विसंगतियों को दूर करना होगा."

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