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विदेश मंत्रियों की बातचीत का दूसरा दिन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच दूसरे दिन की बातचीत हो रही है. रविवार को पहले दिन की बातचीत में कश्मीर और 'सीमापार से घुसपैठ' के मुद्दे छाए रहे. विदेश मंत्रियों ने रविवार को हुई बातचीत के बाद शांति प्रक्रिया जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया था और दोनो पक्षों ने कश्मीर पर अपना पुराना रवैया दोहराया था. दोनों पक्षों के बीच हो रही बातचीत सोमवार को ख़त्म होगी जिसके बाद एक साझा वक्तव्य जारी होने की उम्मीद है. दक्षिण एशिया की इन दोनों परमाणु ताक़तों के बीच पिछले कई सालों की कटुता को दूर करने की कोशिशों के तहत इसी साल जनवरी में शांति वार्ताओं का सिलसिला शुरू हुआ था. दिल्ली से बीबीसी संवाददाता संजीव श्रीवास्तव का कहना है कि सर्वाधिक विवादित कश्मीर मुद्दे सहित कई मुद्दों पर रविवार को व्यापक बातचीत हुई. विदेशमंत्री स्तर की ये बातचीत शनिवार को हुई सचिव स्तर की बातचीत के बाद शुरू हुई है. पहले दिन की बातचीत ख़त्म होने के बाद जारी किए गए एक संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि बातचीत बड़े ही दोस्ताना, सौहार्दपूर्ण और रचनात्मक माहौल में संपन्न हुई.
हालाँकि बातचीत का ब्यौरा नहीं मिल पाया लेकिन दोनों ही पक्षों ने अपनी-अपनी ओर से ये भरोसा दिलाया कि बातचीत आगे बढ़ेगी, उसके टूटने की संभावना नहीं है. हालांकि भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की बातचीत की पृष्ठभूमि में दोनों देशों की तरफ़ से तीखे बयान आए. पाकिस्तान ने जहाँ कश्मीर का उल्लेख किया वहीं भारत ने सीमा पार से हो रही घुसपैठ का मसला उठाया. इसकी वजह से कुछ चिंताएँ होने लगीं थीं और ऐसा लगने लगा था कि दोनों ही पक्ष बातचीत में कड़ा रुख़ अपना सकते हैं, लेकिन परदे के पीछे की कूटनीति ने बातचीत शुरू होने से पहले ही माहौल की तल्ख़ी को दूर कर दिया. इस बातचीत के लिए दोनों पक्षों के बुनियादी रुख़ बिल्कुल साफ़ हैं. भारत कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर बातचीत एक साथ आगे बढ़ाना चाहता है जबकि इस्लामाबाद ये चाहता है कि बातचीत के सभी द्विपक्षीय मुद्दों में कश्मीर विवाद केंद्रीय मुद्दा रहे. अब दोनों विदेश मंत्रियों के सामने चुनौती है बीच का कोई ऐसा रास्ता तलाश करने की, जिस पर चल कर शांति वार्ता को जारी रखा जा सके. उम्मीद पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने शनिवार को दिल्ली पहुँचने पर बातचीत से किसी ठोस नतीजे की उम्मीद जताई थी. कसूरी ने कहा,"हम इसी मक़सद के लिए आए हैं, वक़्त बर्बाद करने नहीं आए. हम अमन की ख़्वाहिश से आए हैं और इसके लिए ज़रूरी है कि मसलों का हल निकाला जाए". उन्होंने इससे पहले इस्लामाबाद में कहा कि कश्मीर की समस्या के हल से दक्षिण एशिया में शांति की नई शुरूआत होगी. उन्होंने कहा, "मैं नहीं मानता कि कश्मीर कोई ऐसी समस्या है जिसका हल नहीं निकल सकता, इसके लिए सिर्फ़ राजनीति इच्छाशक्ति की ज़रूरत है." हालाँकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री के इस बयान पर आपत्ति जताई और भारत सरकार इस बयान को बातचीत का केंद्र कश्मीर की कोशिश मान रही है. |
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