|
'खोखरापार-मुनाबाओ रेल सेवा 2005 से' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के सिंध और भारत के राजस्थान को जोड़ने वाली खोखरापार- मुनाबाओ रेल सेवा अगले साल दो अक्तूबर से शुरू करने की योजना है. उन्होंने बताया कि भारत की ओर से सारी तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं और दोनों देशों के रेल मंत्रियों की इस सिलसिले में बातचीत भी हुई है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच हुई मुलाक़ात के एक दिन बाद भारत के विदेश मंत्री नटवर सिंह ने नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये जानकारी दी. उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत का सिलसिला समग्र बातचीत करने के आधार पर चल रहा है. सीमा विवाद विदेश मंत्री ने तो यहाँ तक कहा कि भारत और चीन ने जिस तरह सीमा विवाद का हल खोजा है या फिर उसे केंद्र विंदु न बनाने का फ़ैसला किया है, उसी मॉडल को भारत और पाकिस्तान को आधार बनाना चाहिए. नटवर सिंह, "हमारी चीन के साथ सीमा पर तनाव के बारे में बातचीत चल रही है. हमारा व्यापार इस साल दिसंबर तक 12 अरब डॉलर तक हो जाएगा. क्यों न हम भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत में ऐसा ही रुख़ अख़्तियार करें. जम्मू-कश्मीर पर बातचीत के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर बातचीत हो." नटवर सिंह ने बताया कि पहले तो पाकिस्तान को इस पर ऐतराज़ था लेकिन अब राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से लेकर कई नेताओं ने कहा है कि वे सिर्फ़ एक मुद्दे पर ही ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहते. नटवर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ये जनादेश ही नहीं है कि वे भारत का दोबारा विभाजन करवाएँ या फिर सीमा में बदलाव करें. भारतीय विदेश मंत्री ने दोहराया कि सरकार संसद में उस प्रस्ताव को लेकर प्रतिबद्ध है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है. नटवर सिंह ने कहा, "अगर आप ग़ौर से देखें कि प्रधानमंत्री ने क्या न्यूयॉर्क में कहा था और क्या श्रीनगर में कहा था-उसमें कोई बदलाव नहीं है और यही बात प्रधानमंत्री ने शौकत अज़ीज़ के सामने रखी. प्रधानमंत्री ने उनसे कहा कि उन्होंने कोई नई बात नहीं कही है. अगर उन्हें इसे लेकर कोई ग़लत फ़हमी है तो मैं उसे दूर करना चाहता हूँ." संतोषजनक भारतीय विदेश मंत्री का कहना है कि यूपीए सरकार ने भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्तों को पटरी पर रखा है और प्रगति संतोषजनक रही है. पूर्व एनडीए सरकार की नीतियों पर उन्होंने टिप्पणी करने से गुरेज़ नहीं किया. नटवर सिंह ने कहा, "दो जुलाई 1972 को शिमला समझौते पर इंदिरा जी और भुट्टो साहब ने हस्ताक्षर किए थे. 22 साल तक शांति रही. लेकिन लाहौर के बाद कारगिल हो गया. और मैं इस बारे में ज़्यादा नहीं कहना चाहता."
नटवर सिंह ने कहा कि यह धारणा कि वे अमरीका विरोधी हैं- ग़लत है और भारत-अमरीका के आपसी संबंध बिल्कुल ठीक-ठाक हैं. जैसे दो बड़े लोकतांत्रिक देशों में होना चाहिए. पश्चिम एशिया के संदर्भ में उनका कहना था कि इराक़ में स्थिति पर उनकी चिंताएँ हैं और वे संयुक्त राष्ट्र की इसमें ज़्यादा भूमिका के हक़ में हैं. फ़लस्तीन से भारत के ऐतिहासिक संबंधों को उन्होंने रेखांकित किया लेकिन ये भी कहा कि इसराइल से संबंधों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. भारतीय प्रधानमंत्री की कश्मीर यात्रा के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के जो बयान आए- उस पर भारत के कूटनीतिक गलियारों से किसी भी प्रकार की औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी. लेकिन गुरुवार शाम को विदेश मंत्री नटवर सिंह ने ज़रूर इस मौक़े का इस्तेमाल किया-भारत का पक्ष दोहराने के लिए. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||