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भारत के रुख़ से पाकिस्तान को निराशा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान ने कहा है कि कश्मीर समस्या के प्रति भारत के रुख़ से उसे निराशा हुई है. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा कि उनके प्रस्ताव पर भारत की प्रतिक्रिया उत्साहवर्द्धक नहीं रही है. पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में कहा कि भारत से जो संकेत आ रहे हैं वे सामान्य रिश्ते बहाल करने की प्रक्रिया को बढ़ावा नहीं देते. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कश्मीर में भारतीय सैनिकों की संख्या में कटौती पर भी उत्साह से टिप्पणी नहीं की और कहा कि यह एक सतही क़दम है. मुशर्रफ़ का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ अगले सप्ताह भारत के दौरे पर जा रहे हैं और गुरुवार को ही भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जम्मू-कश्मीर का अपना दौरा पूरा किया है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी कश्मीर यात्रा के दौरान ही कश्मीर की सीमा में बदलाव करने के किसी भी प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. यह एक ऐसा प्रस्ताव था जो पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने पिछले महीने रखा था. आरोप अपने विशेष इंटरव्यू में मुशर्रफ़ ने भारत पर आरोप लगाया कि वह उदारवादी रुख़ नहीं अपना रहा. मुशर्रफ़ ने कहा, "निश्चित रूप से भारत की ओर से अच्छे संकेत आने चाहिए थे. हमें शांति की दिशा में आगे बढ़ने की इच्छा दिखानी चाहिए लेकिन वहाँ से उलटे संकेत आ रहे हैं. वे शांति को बढ़ावा नहीं देते." राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने पिछले महीने कश्मीर मसले के हल के लिए नई पेशकश करते हुए कहा था कि कश्मीर में जनमतसंग्रह कराने की अभी तक चली आ रही पाकिस्तान की माँग व्यावहारिक नहीं है और भारत नियंत्रण सीमा रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा बना देने की जो माँग करता है, वह स्वीकार्य नहीं है. मुशर्रफ़ ने कश्मीर का पुनर्गठन करने और वहाँ संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को और बढ़ाने का सुझाव भी रखा था. उन्होंने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर में सात अलग-अलग भाषाई, भौगोलिक और धार्मिक इकाइयाँ हैं. मुशर्रफ़ ने कहा था कि भारत और पाकिस्तान को यह तय करना है कि कौन सी इकाई किसके पास रहनी चाहिए और किसे स्वायत्त घोषित कर देना चाहिए. उन्होंने कहा था कि स्वायत्त हिस्से को संयुक्त राष्ट्र के अधीन या फिर दोनों देशों की संयुक्त निगरानी में रखा जा सकता है. इनकार लेकिन बुधवार को श्रीनगर में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट कर दिया था कि कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा में बदलाव भारत मंज़ूर नहीं कर सकता.
हालाँकि इसी दिन जम्मू-कश्मीर से भारतीय सैनिकों की संख्या में कटौती शुरू हो गई थी जिसे महत्वपूर्ण क़दम माना जा रहा है. एएफ़पी के साथ इंटरव्यू में परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि हिंसा उसी समय रुक सकती है जब शांति वार्ता आगे बढ़ेगी. मुशर्रफ़ ने कहा, "निश्चित रूप से जो भी हिंसा फैला रहे हैं या जो आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे हैं. शांति वार्ता के आगे बढ़ने से उनका उत्साह बढ़ेगा और हिंसा में अपने आप कमी आ जाएगी." मुशर्रफ़ ने भारत के उन आरोपों को एक बार फिर ठुकरा दिया कि पाकिस्तान की तरफ से हिंसा को बढ़ावा दिया जाता है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से वहाँ कुछ भी नहीं हो रहा है. यह कश्मीर के अंदर वहीं से हो रहा है. कश्मीर से भारतीय सैनिकों की संख्या में कटौती पर भी राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की प्रतिक्रिया उत्साहजनक नहीं थी. उन्होंने कहा, "ये सतही क़दम हैं जो प्रस्ताव की दिशा में आगे बढ़ने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को संबोधित नहीं करते." इंटरव्यू में मुशर्रफ़ ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि पाकिस्तान उस समय तक कश्मीर में जनमतसंग्रह की मांग नहीं छोड़ेगा जब तक भारत नियंत्रण रेखा को वास्तविक सीमा रेखा मान लेने के मुद्दे पर अपना रुख़ लचीला नहीं बना लेता. मुशर्रफ़ ने कहा, "हम लचीलापन अपनाएँगे लेकिन यह एकतरफ़ा नहीं होगा. पाकिस्तान अकेले अपना रुख़ नहीं बदल सकता. हम जनमतसंग्रह की अपनी बात क्यों छोड़ दे जब वे अपने रुख़ से एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं. इसलिए हम जनमतसंग्रह की अपनी मांग पर क़ायम हैं." उन्होंने कहा कि पाकिस्तान तभी अपनी मांग छोड़ेगा जब भारत भी अपने रुख़ में लचीलापन दिखाने को तैयार होगा. |
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