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सरकार चरमपंथियों के आगे नहीं झुकेगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि उनकी सरकार कश्मीरी चरमपंथियों के आगे नहीं झुकेगी. जम्मू-कश्मीर राज्य के अपने दौरे के आख़िरी दिन जम्मू में प्रधानमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए अपनी बात दोहराई कि सरकार हिंसा का रास्ता छोड़कर आगे आने वाले अलगाववादी संगठनों से बातचीत करने को तैयार है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने के लिए भारत ने जो क़दम उठाए हैं उसका जवाब देने के लिए पाकिस्तान को और समय दिया जाना चाहिए. प्रधानमंत्री बनने के बाद जम्मू-कश्मीर के अपने पहले दौरे पर गए मनमोहन सिंह ने गुरुवार को वरिष्ठ सैनिक अधिकारियों से मुलाक़ात की. मनमोहन सिंह विस्थापित कश्मीरी पंडितों के कैंप में भी गए. मनमोहन सिंह ने कहा कि अपने ही देश में विस्थापित बने कश्मीरी पंडितों की स्थिति देखकर उन्हें पीड़ा हुई है. जनसभा जम्मू में अपने दौरे के आख़िरी दिन गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "जो आतंकवाद के ज़रिए अपना राजनीतिक लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं, उनसे मैं कहना चाहता हूँ कि वे इस रास्ते से सफल नहीं हो पाएँगे." प्रधानमंत्री ने एक बार फिर अलगाववादी संगठनों को बातचीत के लिए सामने आने का निमंत्रण दिया. उन्होंने कहा, "रास्ता भटक गए युवकों के लिए समय आ गया है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर राजनीति की मुख्यधारा में शामिल हों. हमारे दरवाज़े सबके लिए खुले हैं. हम बिना किसी पूर्व शर्त के आपको निमंत्रण देते हैं." हालाँकि कश्मीरी अलगाववादी संगठन हुर्रियत काँफ़्रेंस ने कहा है कि वे सरकार से और स्पष्टीकरण चाहते हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जम्मू कश्मीर में सरकारी नौकरियों में नई भर्ती पर लगे प्रतिबंध को हटाने की भी घोषणा की. बुधवार को श्रीनगर की रैली में जम्मू कश्मीर के लिए 24,000 करोड़ की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी. कश्मीरी पंडितों से मिलने के बाद उन्होंने घोषणा की कि भारत सरकार कश्मीरी पंडितों की समस्याओं पर ध्यान देने के लिए एक समिति का गठन करेगी. मनमोहन सिंह ने विस्थापित परिवारों के लिए मुफ़्त दो कमरे के मकान देने की भी घोषणा की. |
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