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संप्रभुता पर कोई बातचीत नहीं: मनमोहन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश के किसी भी अलगाववादी संगठन से संप्रभुता के बारे में विचार-विमर्श करने से इनकार कर दिया है. अपने पूर्वोत्तर राज्यों के तीन दिवसीय दौरे के आख़िरी दिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि अलगाववादी संगठनों के साथ किसी भी मुद्दे पर बातचीत हो सकती है लेकिन देश की संप्रभुता पर नहीं. उन्होंने असम में उस क़ानून को वापस लेने से भी इनकार कर दिया जिसके तहत ग़ैर क़ानूनी रूप से राज्य में आने वाले लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होती है. असम की राजधानी गुवाहाटी में अपने दौरे के आख़िरी दिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि वे अलगाववादियों की किसी भी उचित मांग पर विचार-विमर्श करने को तैयार हैं लेकिन किसी भी राज्य में भारत की संप्रभुता को लेकर कोई भी विचार नहीं होगा. असम के प्रमुख अलगाववादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (उल्फ़ा) ने कहा था कि अगर असम की संप्रभुता के मुद्दे पर विचार हुआ, तो वे भारत सरकार से बात करने को राज़ी हैं. संभावना नहीं लेकिन मनमोहन सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि असम भारत का अभिन्न अंग है- इस बारे में किसी को संदेह नहीं होना चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा कि असम में ग़ैर क़ानूनी रूप से पड़ोसी देश बांग्लादेश से आने वाले लोगों को लेकर समस्याएँ हैं.
उन्होंने कहा कि इसी कारण इससे संबंधित क़ानून ख़त्म नहीं किया जाएगा क्योंकि इसके बिना असम में रहने वाले भारतीय अल्पसंख्यकों का शोषण हो सकता है. मनमोहन सिंह ने कहा कि उनकी सरकार पड़ोसी देशों के साथ प्रभावी सीमा प्रबंधन के साथ-साथ उनसे बातचीत भी जारी रखेगी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि बांग्लादेश के साथ अलगाववादी संगठनों के कैंप या ग़ैर क़ानूनी रूप से आ रहे लोगों के बारे में ढाका के सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) सम्मेलन में चर्चा नहीं होगी. उन्होंने कहा कि यह सार्क की भावना के ख़िलाफ़ है. लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत बांग्लादेश से इस मुद्दे पर बातचीत जारी रखेगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि वे सीमा पर बाड़ लगाने की प्रक्रिया को और तेज़ करना चाहेंगे क्योंकि इससे देश में ग़ैर क़ानूनी रूप से बाहर से आने वाले लोगों पर नियंत्रण किया जा सकेगा. |
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