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'विशेषाधिकार क़ानून' पर पुनर्विचार होगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मणिपुर में जनता को आश्वासन दिया है कि विवादास्पद सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून पर पूरी तरह पुनर्विचार होगा. लेकिन उन्होंने स्पष्ट संकेत दे दिए कि इस क़ानून को हटाया नहीं जाएगा. उनका कहना था, "मैं उस दिन का सपना देखता हूँ जब मणिपुर हिंसा से मुक्त होगा. जब ऐसा होगा तो मणिपुर सुरक्षा बलों से भी मुक्त हो जाएगा जो हिंसा से निपटने के लिए मणिपुर में हैं." पर्यवेक्षकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने काफ़ी संकेत दे दिए हैं कि वे चाहते हैं कि मणिपुरी अलगाववादी पहले बातचीत शुरु करें और तब ही केंद्र सरकार वहाँ तैनात सुरक्षा बलों की संख्या में कमी लाएगी या ये विवादास्पद क़ानून को हटाएगी. हड़ताल अलगाववादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ़्रंट (आरपीएफ़) का कहना है कि प्रधानमंत्री कश्मीर और मणिपुर में अलग-अलग नीति अपना रहे हैं. इन संगठनों के एक बयान में कहा गया है कि कश्मीर से सेना हटाई जा रही है और मणिपुर में तैनात की जा रही है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मणिपुर विश्वविद्यालय में कहा कि वे राज्य में एक नई प्रक्रिया शुरु करने आए हैं. उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जीवन रैड्डी उस पाँच सदस्यों की समिति की अध्यक्षता कर रहे हैं जो विवादास्पद क़ानून पर पुनर्विचार कर रही है.
उनका कहना था कि मणिपुर के लोगों की आकाँक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़रूरतों के बीच संतुलन बनाने की ज़रूरत है. मणिपुर में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता आयोजित एक समारोह में ऐतिहासिक काँगला किले को अर्धसैनिक बल असम राईफ़ल्स से वापस राज्य सरकार को सौंप दिया गया. कड़ी सुरक्षा मणिपुर में अलगाववादी संगठनों के हड़ताल के आह्वान के बाद राज्य में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है. मणिपुर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम के विरोध में कई महीनों से आंदोलन चल रहा है. असम राइफ़ल्स के कुछ जवानों पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला मनोरम देवी का पहले बलात्कार किया और फिर उनकी हत्या कर दी. इसके बाद ही सशस्त्र सैनिकों को मिले विशेषाधिकार के ख़िलाफ़ राज्य में आंदोलन शुरू हो गया था. इस बीच राज्य में कई छात्र और मानवाधिकार संगठनों के संयुक्त मोर्चे अपुन्बा लुप का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री ने इस क़ानून को वापस लेने की घोषणा नहीं की तो संगठन अपना आंदोलन तेज़ कर देगा. |
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