| मणिपुर: पाटिल से बातचीत विफल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर से विवादास्पद क़ानून वापस लेने की संभावना से इनकार कर दिया है. गृह मंत्री से मिलने गए मणिपुर के विभिन्न संगठनों ने इसके बाद उनके साथ बातचीत का बहिष्कार कर दिया है. इन संगठनों का कहना है कि अब वे विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे. उन्होंने कहा कि गृह मंत्री मणिपुर के लोगों के सामने पेश आ रही परेशानियों के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाए हैं. इस बीच गृह मंत्री ने कहा है कि वह मणिपुर में लागू क़ानून की समीक्षा से इनकार नहीं कर रहे हैं मगर पूरे राज्य से इसे तुरंत हटा लेने की कोई संभावना नहीं है. इस क़ानून के तहत राज्य में सेना को व्यापक अधिकार मिले हैं. पाटिल ने कहा, "मणिपुर में ज़मीनी हक़ीक़त इस समय क़ानून हटाने लायक़ नहीं है." केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बल विशेषाधिकार अधिनियम नाम का यह क़ानून सैनिकों और अर्धसैनिक बलों को विशेष अधिकार देता है. जुलाई से ही राज्य में इस क़ानून के विरोध में आंदोलन चल रहा है. चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अपनी कार्रवाई के दौरान सेना को इस क़ानून के तहत गिरफ़्तारी, पूछताछ और जवाबी कार्रवाई के लिए व्यापक अधिकार दिए गए हैं. इस आंदोलन में कई छात्र और युवा संगठनों के साथ-साथ महिला और मानवाधिकार संगठन भी शामिल हैं. |
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