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विवादित क़ानून वापस लेने पर विचार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर के सत्ताधारी गठबंधन ने राज्य मंत्रिमंडल को विवादित क़ानून वापस लेने के लिए अधिकृत किया है. केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बल विशेषाधिकार अधिनियम नाम का यह क़ानून सैनिकों और अर्धसैनिक बलों को विशेष अधिकार देता है. चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अपनी कार्रवाई के दौरान सेना को इस क़ानून के तहत गिरफ़्तारी, पूछताछ और जवाबी कार्रवाई के लिए व्यापक अधिकार दिए गए हैं. इस मामले पर विचार करने के लिए आज राज्य मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक चल रही है. इस बैठक में इस पर भी विचार होगा कि किन-किन इलाक़ों से इस क़ानून को वापस लिया जाए. मणिपुर में इस विशेष क़ानून के ख़िलाफ़ पिछले एक महीने से आंदोलन चल रहा है. बैठक काँग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी विधायकों के दबाव के कारण मुख्यमंत्री इबोबी सिंह ने सोमवार रात सत्ताधारी धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन के विधायकों की बैठक बुलाई. बैठक में मौजूद कुछ विधायकों ने बीबीसी को बताया कि बैठक हंगामेदार रही. काँग्रेस के आठ युवा विधायकों के साथ-साथ गठबंधन को समर्थन दे रहे कम्युनिस्ट पार्टी के पाँच विधायकों ने धमकी दी कि अगर यह क़ानून वापस नहीं लिया गया तो वे सरकार से समर्थन वापस ले लेंगे. विधायकों की माँग के आगे आख़िरकार मुख्यमंत्री इबोबी सिंह को झुकना ही पड़ा और फिर सत्ताधारी गठबंधन ने इस विशेष क़ानून को वापस लेने के पक्ष में प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास कर दिया. अब राज्य मंत्रिमंडल को यह अधिकार दे दिया गया है कि वह उन इलाक़ों का चयन करे जहाँ से इस क़ानून को वापस लेना है. वैसे भारत सरकार इस क़ानून को वापस लिए जाने के पक्ष में नहीं है. उसका कहना है कि उग्रवादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई में लगे सैनिकों को क़ानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए. लेकिन गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए राज्य के कुछ इलाक़ों से इस क़ानून को वापस लेने पर अपनी सहमति दे सकती है. पिछले महीने एक स्थानीय लड़की की मौत के बाद से ही ये संगठन सड़कों पर उतर आए. आरोप है कि इस लड़की के साथ असम राइफ़ल्स के सैनिकों ने कथित रूप से बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी. |
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