| मणिपुर में मंत्रियों की इस्तीफ़े की धमकी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मणिपुर की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के मंत्रियों ने धमकी दी है कि यदि सरकार राज्य में छापामारों के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई के लिए सशस्त्र बलों को अत्यधिक छूट देने वाले क़ानून को वापस नहीं लेती है तो वे इस्तीफ़ा दे देगें. राज्य में विपक्षी विधायकों ने पहले ही यह जता दिया है कि वे इस विशेष क़ानून के खिलाफ़ रविवार को आंदोलन कर जनता को इसके खिलाफ जागरुक करेगें. सैनिकों को विशेषाधिकार देने वाले इस विशेष क़ानून का विरोध जुलाई में ही शुरू हो गया था जब टीएच मनोरमा नाम की एक स्थानीय लड़की के साथ बलात्कार का मामला प्रकाश में आया. इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री ओकराम आइबोबी सिंह पूरे मामले पार्टी हाईकमान को अवगत कराने के लिए दिल्ली गए हुए हैं. विपक्षी दलों सहित सरकार को सर्मथन देने वाले विधायकों ने भी धमकी दे रखी है कि वे मणिपुर के उन 32 संगठनों में शामिल होने के लिए तैयार हैं जो इस क़ानून का विरोध कर रहे हैं. ज्ञात हो कि इन विरोधी संगठनों को स्थानीय मानवाधिकार समिति के साथ-साथ छात्रों, महिलाओं तथा युवकों का समर्थन प्राप्त है. प्रदर्शन मणिपुर की राजधानी इम्फाल में हज़ारों छात्र और महिलाएँ इस कानून के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया है. इस प्रर्दशन को तोड़ने के लिए पुलिस को कई स्थानों पर लाठीचार्ज भी करना पड़ा है. अनियंत्रित हो चुके प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए पड़ोसी राज्यों से भी अर्द्धसैनिक बलों को मणिपुर बुलाया गया है. प्रर्दशनकारियों ने कई जगह पर सरकारी इमारतों में आग लगा दी है जबकि महिलाएँ अपने शरीर पर बैनर लपेटे सैन्य छावनी के सामने धरना दे रही हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक मनोरमा को न्याय नहीं मिल जाता और सैनिकों को दिए गए विशेषाधिकार को वापस नहीं लिया जाता तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. दूसरी ओर सरकार की ओर से जारी एक ताज़ा बयान में कहा गया है कि राज्य में इस विशेष कानून की आवश्यकता है या नहीं इस पर 15 अगस्त तक फैसला कर लिया जायेगा. |
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