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असम राइफ़ल्स को हटाने पर विचार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने कहा है कि सरकार मणिपुर की स्थिति को देखते हुए वहाँ से असम राइफ़ल्स के जवानों को वापस बुला सकती है. लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि असम राइफ़ल्स के जवानों को वापस बुलाने की प्रक्रिया में वक़्त लगेगा. मणिपुर में केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बल विशेषाधिकार अधिनियम के विरोध में एक महीने से आंदोलन चल रहा है और इस आंदोलन में निशाने पर हैं असम राइफ़ल्स के जवान. पिछले महीने एक स्थानीय लड़की की मौत के बाद से ही लोग सड़कों पर उतर आए. आरोप है कि इस लड़की के साथ असम राइफ़ल्स के सैनिकों ने कथित रूप से बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी. इस बीच मणिपुर में आंदोलन जारी है और पुलिस के साथ ताज़ा झड़पों में कम से कम 25 लोग घायल हो गए हैं. प्रदर्शनकारियों ने राजधानी इम्फ़ाल में सरकारी इमारतों में घुसने की कोशिश की जिसके जवाब में पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा. विचार मणिपुर से असम राइफ़ल्स के जवानों को वापस बुलाए जाने के बारे में गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने कहा, "असम राइफ़ल्स ने राज्य में अपने कर्तव्यों का पालन सही ढंग से किया है. लेकिन, अगर राज्य के लोग चाहते हैं कि असम राइफ़ल्स को वापस बुलाया जाए तो हम जवानों को वापस बुला सकते हैं. लेकिन यह आज या कल में नहीं हो सकता. इसमें समय लगेगा." उन्होंने कहा कि जवानों को कैसे या कब हटाया जाए-इस बारे में फ़ैसला इस तरह होगा ताकि जवानों को शर्मिंदा न होना पड़े. गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने यह स्पष्ट किया कि उनमें और रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी के बीच इस बारे में कोई मतभेद नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रणव मुखर्जी ने कभी यह नहीं कहा कि असम राइफ़ल्स को मणिपुर से हटाया नहीं जा सकता. केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बल विशेषाधिकार अधिनियम नाम का यह क़ानून सैनिकों और अर्धसैनिक बलों को विशेष अधिकार देता है. चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अपनी कार्रवाई के दौरान सेना को इस क़ानून के तहत गिरफ़्तारी, पूछताछ और जवाबी कार्रवाई के लिए व्यापक अधिकार दिए गए हैं. |
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