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मणिपुर में विशेष क़ानून पर आंदोलन तेज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में उस विशेष क़ानून के ख़िलाफ़ चल रहा आंदोलन और तेज़ हो गया है जिसमें केंद्रीय सुरक्षा बलों को विशेषाधिकार दिए गए हैं. रविवार को हज़ारों महिलाएँ, पुरुषों और बच्चों तक ने राजधानी इंफाल में एक बड़ी रैली निकाली और इस क़ानून के ख़िलाफ़ नारे लगाए. बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार भी किया गया है. केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बल विशेषाधिकार अधिनियम नाम का यह क़ानून सैनिकों और अर्धसैनिक बलों को विशेष अधिकार देता है. चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अपनी कार्रवाई के दौरान सेना को इस क़ानून के तहत गिरफ़्तारी, पूछताछ और जवाबी कार्रवाई के लिए व्यापक अधिकार दिए गए हैं. इस क़ानून के ख़िलाफ़ मणिपुर के क़रीब 30 संगठन महीने भर से आंदोलन कर रहे हैं. इनमें कई छात्र और युवा संगठनों के साथ-साथ महिला और मानवाधिकार संगठन भी शामिल हैं. पिछले महीने एक स्थानीय लड़की की मौत के बाद से ही ये संगठन सड़कों पर उतर आए. आरोप है कि इस लड़की के साथ असम राइफ़ल्स के सैनिकों ने कथित रूप से बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी. बड़ी रैली रविवार को एक बार फिर बड़ी संख्या में लोग इस क़ानून को वापस लेने की माँग को लेकर सड़कों पर उतर आए. पुलिस ने नेताओं और सैनिक कमांडरों के पुतले जला रहे क़रीब 800 प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार कर लिया. आंदोलन का नेतृत्व कर रही समिति के प्रवक्ता आरके आनंद ने बीबीसी को बताया कि सभी राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कार्यालय सोमवार से बंद रहेंगे क्योंकि कर्मचारियों ने भी अब आंदोलन में शामिल होने का फ़ैसला कर लिया है. आनंद ने बताया कि ट्रक ड्राइवरों ने भी अपने ट्रक राज्य से बाहर नहीं ले जाने का फ़ैसला किया है. राज्य के अधिकारियों का कहना है कि इससे आवश्यक सामानों की आपूर्ति पर बुरा असर पड़ेगा. इस बीच स्थानीय लड़की की हत्या के मामले में तलब किए गए असम राइफ़ल्स के चार जवान न्यायिक समिति के सामने पेश नहीं हुए. इन सैनिकों के वकील का कहना है कि उनकी जान पर ख़तरा है और डर है कि कहीं अलगाववादी विद्रोही उन्हें गोली न मार दें. इन सैनिकों का दावा है कि विद्रोहियों ने उन्हें मारने के लिए एक लाख रुपए के इनाम की घोषणा की है. लेकिन मारी गई लड़की के परिवार वालों के वकील का कहना है कि ये सैनिक जान-बूझकर ऐसा कर रहे हैं. |
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