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असम राइफ़ल्स के जवानों को चेतावनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में बलात्कार के एक मामले की जाँच कर रहे आयोग ने असम राइफ़ल्स के चार जवानों के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का वारंट जारी करने की चेतावनी दी है. मणिपुर में इसी मामले पर क़रीब डेढ़ महीने से आंदोलन चल रहा है. लोग राज्य में सैनिकों को दिए गए विशेष अधिकारों का विरोध कर रहे हैं. इसका और ज़ोरदार विरोध तब शुरू हुआ था जब एक स्थानीय महिला मनोरमा का कथित तौर पर सैनिकों ने बलात्कार किया था और उसकी हत्या कर दी थी. इस मामले की जाँच कर रहे आयोग का नेतृत्व कर रहे पूर्व जज सी उपेंद्र ने असम राइफ़ल्स की उस याचिका को ख़ारिज कर दी जिसमें सैनिकों की पेशी की समयसीमा बढ़ाने की अपील की गई थी. केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बल विशेषाधिकार अधिनियम नाम का यह क़ानून सैनिकों और अर्द्धसैनिक बलों को विशेष अधिकार देता है. चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के दौरान सेना को इस क़ानून के तहत गिरफ़्तारी, पूछताछ और जवाबी कार्रवाई के लिए व्यापक अधिकार दिए गए हैं. असम राइफ़ल्स ने आयोग की जाँच में अभी तक सहयोग नहीं किया है. असम राइफ़ल्स का कहना है कि राज्य में उग्रवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई में लगे सैनिकों के ख़िलाफ़ जाँच का अधिकार आयोग के अधिकारक्षेत्र में नहीं है. मणिपुर में इस मामले पर क़रीब डेढ़ महीने से आंदोलन चल रहा है और एक छात्र ने आत्मदाह भी कर लिया है. |
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