| विद्रोही हिंसा छोड़कर बात करें:सिंह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पूर्वोत्तर भारत की अपनी यात्रा के दूसरे चरण में असम पहुँच गए हैं. उन्होंने उल्फ़ा और अन्य विद्रोही गुटों से कहा है कि वे हिंसा छोड़कर बात करें. प्रधानमंत्री बनने के बाद मनमोहन सिंह का पूर्वोत्तर भारत का ये पहला दौरा है. मनमोहन सिंह असम से ही राज्यसभा के सांसद हैं और दो दिन के अपने दौरे में वे कई स्थानीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. अपने दौरे के पहले चरण में उन्होंने मणिपुर की यात्रा की जहाँ उन्होंने पूर्वोत्तर भारत के अलगाववादी संगठनों को बातचीत के लिए आगे आने का निमंत्रण दिया. उन्होंने कहा कि नवयुवकों और महिलाओं को वे हथियार छोड़कर सरकार के साथ काम करने का निमंत्रण दिया जिससे उत्तर पूर्व में शांति और समृद्धि का रास्ता बने. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मनमोहन सिंह ने मणिपुर की राजधानी इंफ़ाल से गुवाहाटी के लिए रवाना होने से पहले पत्रकारों से कहा,"हमारी सरकार ऐसे किसी भी संगठन से बात करने के लिए तैयार है जो हिंसा का रास्ता छोड़कर सभी समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान की इच्छा रखता हो". मणिपुर में भरोसा मनमोहन सिंह ने मणिपुर के अपने दौरे में पूर्वोत्तर भारत में लागू विवादास्पद सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून पुनर्विचार किए जाने का आश्वासन दिया. लेकिन उन्होंने साथ ही ये भी संकेत दिए कि इस क़ानून को हटाया नहीं जाएगा. इस वर्ष मणिपुर में मनोरमा देवी नामक एक स्थानीय महिला की मौत के बाद राज्य में इस विवादास्पद क़ानून का जमकर विरोध हुआ था. सुरक्षाबलों का कहना था कि महिला के संबंध चरमपंथियों से थे जबकि स्थानीय लोग महिला को बेक़सूर बताते हुए उसकी गिरफ़्तारी को ज़्यादती बता रहे थे. जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मणिपुर के अलगाववादियों को पहले बातचीत के लिए आने और इसके बाद ही किसी और बारे में विचार करने के संकेत दिए हैं. प्रेक्षकों की राय में प्रधानमंत्री चाहते हैं कि पहले बातचीत शुरु हो और तब ही केंद्र सरकार वहाँ तैनात सुरक्षा बलों की संख्या में कमी लाएगी या ये विवादास्पद क़ानून को हटाएगी. |
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