|
परमाणु नीति पर मनमोहन की सफ़ाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि भारत की परमाणु नीति के बारे में आई उस टिप्पणी की सत्यता का पता लगाया जाएगा जो बताया जा रहा है कि विदेशमंत्री नटवर सिंह ने की. एक स्थानीय अख़बार ने विदेशमंत्री नटवर सिंह के नाम से ये बयान छापा कि उत्तर और दक्षिण कोरिया को भारत की तरह परमाणु शक्ति बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. नटवर सिंह अभी दक्षिण कोरिया की यात्रा कर रहे हैं. समाचारपत्र में ये भी कहा गया कि विदेशमंत्री ने परमाणु मुद्दों पर पाकिस्तान के साथ संबंध को लेकर पिछली सरकार पर आरोप लगाए. अख़बार के अनुसार विदेश मंत्री ने कहा कि इसी कारण 1998 में भारत और पाकिस्तान ने एक के बाद एक परमाणु परीक्षण किए. विदेश मंत्री के इस कथित बयान पर गुरूवार को संसद में विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री से स्पष्करण की माँग की. इस पर राज्यसभा में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विदेश मंत्री को जो कुछ कहते हुए बताया गया है कि यह भारत रकार का बयान नहीं है. उन्होंने कहा,"नटवर सिंह की ओर से जिस बयान की बात की जा रही है वह सरकार की नीति नहीं दर्शाता. हम एक परमाणु शक्ति हैं और एक ज़िम्मेदार परमाणु शक्ति हैं." मनमोहन सिंह ने कहा कि निश्चित रूप से किसी पत्रकार ने नटवर सिंह से सवाल किया होगा जिसके जवाब में उन्होंने कोई टिप्पणी की होगी. उन्होंने सदस्यों से कहा,"भारत सरकार की परमाणु नीति को लेकर कोई अनिश्चितता नहीं है". प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अख़बार में छपी रिपोर्ट देखी है और जब नटवर सिंह विदेश से लौटेंगे तब ये पता लगाया जाएगा कि रिपोर्ट कितनी सही है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||