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परमाणु मुद्दा: वार्ता में ख़ास समझौता नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध का ख़तरा टालने की कोशिशों को लेकर हुई दो दिवसीय बातचीत बिना किसी ख़ास समझौते के ख़त्म हो गई है. इस्लामाबाद में हुई बैठक के बाद एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष परमाणु मुद्दे पर भरोसा बढ़ाने की दिशा में काम करते रहेंगे. बैठक में इसी साल जून में दिल्ली में हुई बातचीत के दौरान किए गए फ़ैसलों को लागू करने पर भी चर्चा हुई. संयुक्त बयान में दोनों देशों के विदेश मंत्रालय के बीच हॉट लाइन स्थापित करने का भी वादा किया गया है. जो दिल्ली की बैठक के दौरान तय हुआ था. बयान में कहा गया है कि ये क़दम दोनों देशों के बीच ग़लतफ़हमी और परमाणु मुद्दे पर ख़तरा कम करने की कोशिशों के तहत उठाए जा रहे हैं. लेकिन बयान में यह नहीं बताया गया है कि दोनों पक्ष अभी तक इसे लागू न करने में क्यों नाकाम रहे हैं. संयुक्त बयान में यह ज़रूर कहा गया है कि दोनों पक्ष बातचीत जारी रखेंगे. इस बीच सीमा विवाद पर विशेषज्ञों की एक अन्य बैठक में यह सहमति हुई कि सर क्रीक के तटीय सीमावर्ती इलाक़े का संयुक्त सर्वेक्षण अगले साल जून में होगा. संयुक्त टीम इस सीमावर्ती इलाक़े में लगाए गए खंभों का पर्यवेक्षण करेगी जिस पर दोनों देशों में विवाद है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस बातचीत का एक उद्देश्य मिसाइल परीक्षण से पहले सूचित करने पर औपचारिक समझौते को अंतिम रूप भी देना था. इस बीच मादक दवाओं के ग़ैर क़ानूनी व्यापार पर दिल्ली में हुई बातचीत में दोनों देशों ने मिल कर बातचीत करने पर सहमति व्यक्त की. |
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