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सार्क शिखर सम्मेलन फिर स्थगित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दक्षेस ( सार्क ) शिखर बैठक में भाग नहीं लेने के फैसले के साथ ही सार्क शिखर सम्मेलन एक बार फिर स्थगित हो गया है. भारत के विदेश सचिव श्याम सरन ने कहा " भारत ने अपने पड़ोसी देश की स्थिति देखते हुए सार्क बैठक में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है. हमने बांग्लादेश को इस फैसले की सूचना दे दी है और उनसे नई तारीखें तय करने के लिए कहा है." नेपाल में सरकार बर्खास्त करने के नेपाल नरेश के फ़ैसले की भारत ने कड़ी आलोचना की है और माना जा रहा है कि सम्मेलन के स्थगति होने का एक कारण यह भी हो सकता है. विदेश सचिव श्याम सरन ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह छह फरवरी से होने वाले सार्क सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगे. सार्क के चार्टर के अनुसार अगर किसी भी सदस्य देश का प्रमुख बैठक में हिस्सा नहीं लेता है तो बैठक का आयोजन नहीं किया जा सकता. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को इस बारे में कैबिनेट में और फिर विपक्ष के नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी एवं लालकृष्ण आडवाणी से भी बातचीत की थी. भारतीय अधिकारियों के अनुसार मनमोहन सिंह ने यह फैसला किया है ताकि नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र पर लोकतंत्र बहाल करने का दबाव बढ़े. भारत को यह भी डर था कि सार्क में ज्ञानेंद्र के साथ एक ही मंच पर मनमोहन सिंह के आने से ज्ञानेंद्र के फैसले को वैधता मिलने की संभावना बढ़ सकती थी जो भारत नहीं चाहता है. नेपाल ने कल स्पष्ट कर दिया था कि वो सार्क में हिस्सा लेगा और नरेश ज्ञानेद्र नेपाल का प्रतिनिधित्व करेंगे. इससे पहले सूनामी के कारण जनवरी माह के पहले हफ्ते में होने वाले सार्क सम्मेलन को स्थगित किया गया था. अब यह सम्मेलन छह फरवरी से ढाका में होना था. |
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