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नेपाल में राजनीतिक संकट गहराया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने सरकार को बर्ख़ास्त कर दिया है जिसके साथ ही राजनीतिक संकट गहरा गया है. नरेश ज्ञानेंद्र ने यह भी घोषणा की है वह सरकार बर्ख़ास्त करने के साथ ही देश का नियंत्रण अपने हाथों में ले रहे हैं. तीन साल में यह दूसरा मौक़ा है जब महाराज ज्ञानेंद्र ने देश का नियंत्रण अपने हाथों में लिया है. नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने आरोप लगाया है कि सरकार संसदीय चुनाव कराने और देश में शांति स्थापना करने में नाकाम रही है. उन्होंने प्रधानमंत्री शेर बहादुर देऊबा को बर्ख़ास्त कर दिया. देऊबा को पिछले साल नियुक्त किया गया था और उन्हें चुनाव कराने और माओवादी विद्रोहियों के साथ बातचीत करने की ज़िम्मेदारी दी गई थी. देऊबा को अक्तूबर, 2002 में बर्ख़ास्त कर दिया गया था लेकिन भारी प्रदर्शनों के बाद फिर से बहाल कर दिया गया था. ग़ौरतलब है कि माओवादी विद्रोही एक समाजवादी व्यवस्था की स्थापना के लिए 1996 से सशस्त्र लड़ाई कर रहे हैं. सरकार के ख़िलाफ़ हो रही इस लड़ाई में दस हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है. |
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