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नेपाल में 13 सुरक्षाकर्मी मारे गए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में सुरक्षा बलों और माओवादी विद्रोहियों के बीच हुई हिंसक झड़प में 13 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं और 49 अन्य लापता हैं. ये आँकड़े सुरक्षा बलों ने दिए हैं और उनके अनुसार छह विद्रोही मारे गए हैं. लेकिन माओवादी विद्रोहियों के अनुसार बीस सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं. उधर भारत और नेपाल के गृह मंत्रालयों ने प्रत्यर्पण संधि पर अंतिम फ़ैसला कर लिया है जिसके तहत इन देशों के अपराधियों और संदिग्ध चरमपंथियों का प्रत्यर्पण हो सकेगा. इस बारे में संधि पर हस्ताक्षर बाद में होंगे. दूसरी ओर लंदन स्थित मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने नेपाल में सरकार और माओवादी विद्रोहियों पर मावाधिकार हनन के आरोप लगाए हैं. इस संगठन के अनुसार दोनो ही पक्ष अवैध तरीके से लोगों को जान से मार रहे हैं और लगभग दो हज़ार लोग इस तरीके से अपनी जान गँवा चुके हैं माना जाता है कि 1996 में माओवादियों के सशस्त्र संघर्ष की शुरुआत के बाद लगभग दस हज़ार लोग मारे जा चुके हैं. घात लगाकर हमला ये झड़प तब हुईं जब लगभग तीस सुरक्षाकर्मियों ने एक प्रमुख राजमार्ग पर लगाई बाधाओं को हटाने की कोशिश की. जब वे वापस आ रहे थे तब उन पर घात लगाकर हमला किया गया. दोनो तरफ़ से कई घंटे तक गोलीबारी हुई. इस घटना के बाद पूर्वी ज़िले ईलाम के उस इलाक़े में अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजे गए . ताज़ा हिंसा की घटनाएँ सरकार की माओवादियों को बातचीत के लिए लौटने की समयसीमा के ख़त्म हो जाने के बाद हो रही हैं. प्रधानमंत्री शेर बहादुर दयुबा घोषणा कर चुके हैं कि संसदीय चुनाव करवाए जाएँगे. उधर माओवादियों ने इन चुनावों के दौरान हिंसक गतिविधियाँ करने की धमकी दी है. |
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