|
भारत की सहायता चाहिए: देउबा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की यात्रा पर पहुँचे नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने नेपाल में माओवादी विद्रोह की समस्या पर भारतीय नेताओं से बातचीत की है. पाँच दिन की आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुँचे देउबा ने राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की है. वह विदेश मंत्री नटवर सिंह, रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी और गृह मंत्री शिवराज पाटिल से भी मिलेंगे. नेपाल के अधिकारियों ने बताया है कि नेपाल ने माओवादी विद्रोहियों के ख़तरे के बारे में भारत को अवगत करा दिया है. विदेश मंत्री से मिलने से पहले देउबा ने कहा, "आतंकवाद के विरुद्ध नेपाल के युद्ध में भारत की समझ, सहयोग और मदद की महत्त्वपूर्ण भूमिका है." उन्होंने कहा, "इस चुनौती से निपटने के लिए हमें अपनी क्षमता बढ़ानी होगी और इसमें भारत की मदद काफ़ी अहम है." भारत भी इस बात को लेकर चिंतित रहा है कि नेपाल में फैला माओवाद उसके भी कई हिस्सों में पैर पसार सकता है. इसके अलावा भारत की चिंता नेपाल में उसके कारोबार को लेकर भी है. इस बीच भारतीय तेल कंपनी इंडियन ऑयल की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि नेपाल में पेट्रोलियम पदार्थों की सुचारू आपूर्ति के लिए भारत एक पाइपलाइन बनाएगा. देउबा की इस यात्रा के दौरान इंडियन ऑयल और नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर होगा. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इंडियन ऑयल के अधिकारियों के हवाले से कहा है कि 35 किलोमीटर की ये पाइपलाइन 35 करोड़ रुपए की लागत से बनेगी. भारत और नेपाल के नेताओं बीच ये बैठक मुख्य रूप से सुरक्षा संबंधी मसलों पर केंद्रित रहने की संभावना है. भारत नेपाल को हथियार, सैनिक उपकरण और सैनिकों को प्रशिक्षण देता है. दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और खेल के साथ ही मौसम की भविष्यवाणी जैसे मामलों में समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||