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अवरोध ख़त्म कराने के लिए प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल की राजधानी काठमांडू में हज़ारों नागरिकों ने शांति रैली कर माओवादियों से अपना अवरोध ख़त्म करने को कहा है. इस रैली का आयोजन कई व्यावसायिक संगठनों ने मिलकर किया और हज़ारों नागरिकों ने इसका समर्थनक किया. एक अलग प्रदर्शन में कुछ लोगों ने खाना, कपड़ा और माओवादियों से रक्षा की माँग की है. माओवादियों ने नेपाल में पिछले पाँच दिनों से राजधानी काठमांडू का संपर्क देश के अन्य हिस्सों से काटा हुआ है. उन्होंने विदेशी हिस्सेदारी वाले कई व्यवसायों को बंद भी करवा दिया है. उनके अवरोध के कारण कई जगहों से आवश्यक वस्तुओं की कमी होने की ख़बरें मिल रही हैं. माँग और हमले
माओवादी नेपाल की जेलों में बंद अपने साथियों की रिहाई की माँग कर रहे हैं. उन्होंने कई जगहों पर हमले भी किए हैं. ताज़ा हमले में उन्होंने पश्चिमोत्तर नेपाल के शहर जुमला खालंगा में ज़िला मुख्यालय पर हमला कर एक सैनिक को मार डाला और छह पुलिसकर्मियों का अपहरण कर लिया. एक पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि सैनिकों और विद्रोहियों के बीच लगभग छह घंटे तक लड़ाई चली जिसके बाद सेना ने शहर पर नियंत्रण कर लिया. भारत की भूमिका इस बीच नेपाल के कुछ वरिष्ठ नेताओं की भारत यात्रा से यह भी अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि शायद भारत इस मामले में दख़ल दे. ख़बर यह भी है कि दिल्ली में इस मामले पर कैबिनेट की बैठक भी हुई है. नेपाली राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक पार्टी के नेता पशुपति राणा दिल्ली दौरे से लौट आए हैं. लेकिन कन्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल के महासचिव माधव नेपाल अभी दिल्ली में ही हैं. भारत पर यह आरोप लगता रहा है कि वह नेपाल के माओवादी विद्रोहियों को समर्थन देता है. लेकिन हाल के दिनों में अमरीका और ब्रिटेन की वहाँ बढ़ती रुचि को लेकर भी भारत चिंतित है और वह नहीं चाहता कि अमरीका किसी भी रूप में नेपाल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराए. इसलिए माना जा रहा है कि शायद भारत सरकार इस मामले में दख़ल देने पर गंभीरता पूर्वक विचार कर रही है. |
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