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समझौते से सरकार का इनकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में सरकार ने माओवादियों के साथ किसी तरह के समझौते से इनकार करते हुए कहा है कि वह आतंक से डरने वाली नहीं है. सरकार ने व्यावसायियों और उद्योगपतियों से कहा है कि वे अपना कारोबार फिर शुरु करें और सरकार उनकी पूरी सुरक्षा करेगी. उधर काठमांडू में अवरोध के तीसरे दिन माओवादी विद्रोहियों ने शहर में दो बम विस्फोट किए हैं. काठमांडू शहर की सड़कों पर लोग कम दिखाई दे रहे हैं. वहाँ भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता कम होती जा रही है. उल्लेखनीय है कि देश में प्रजातंत्र की स्थापना की माँग को लेकर माओवादी लंबे समय आंदोलन कर रहे हैं. इस बार इनके आंदोलन में एक आरोप यह जुड़ा है कि उद्योग-व्यवसाय में कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है. मंत्रिमंडल की बैठक नेपाल सरकार ने शुक्रवार की सुबह मंत्रिमंडल की एक आपात बैठक बुलाई थी. समझा जा रहा था कि इस बैठक के बाद सरकार माओवादी विद्रोहियों के साथ किसी तरह के समझौते की पहल कर सकती है लेकिन सरकार ने घोषणा की है कि वह माओवादियों के आगे झुकने को तैयार नहीं है. सरकार की ओर कहा गया है कि यदि माओवादी अपनी ज़िद पर अड़े रहते हैं तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने उनकी सच्चाई सामने आएगी. बैठक के बाद सूचना मंत्री डॉ मोहम्मद मोहसिन ने उद्योगपतियों और व्यावसायियों से अपील की है कि वे अपना कारोबार शुरु करें और सरकार उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराएगी. उन्होंने ट्रक ऑपरेटरों से भी कहा है कि वे सामान्य परिवहन जारी रखें. डॉ मोहसिन ने कहा कि यदि माओवादी उनके ट्रकों को नुक़सान पहुँचाते हैं तो क्षतिपूर्ति करेगी. सूचना मंत्री ने बीबीसी से कहा, "सरकार दबाव डालकर या धमकी देकर तो उद्योग-व्यवसाय फिर शुरु नहीं करवा सकती. वह सिर्फ़ अपील कर सकती है." उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री देउबा की भारत यात्रा कार्यक्रम में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा है. उनका कहना था कि उनकी यात्रा दोनों देशों के आपसी रिश्तों पर बातचीत के लिए हो रही है. जनजीवन पर असर
काठमांडू की घेरेबंदी के तीसरे दिन जनजीवन पर असर दिखाई देने लगा है. शहर में भोजन और ईंधन की कमी होने लगी है. हालांकि गुरूवार तक वहाँ बाज़ार में ख़रीदारी सामान्य रही और कोई अफ़रा-तफ़री नहीं देखी गई. शहर में यातायात आम दिनों की अपेक्षा बहुत कम है. हालांकि माओवादियों ने शहर में कोई रुकावट नहीं खड़ी की है लेकिन उनकी धमकियों का मनोवैज्ञानिक असर इतना है कि लोग कम ही बाहर निकल रहे हैं. काठमांडू को देश के बाक़ी हिस्सों से जो दो सड़कें जोड़ती हैं और विद्रोहियों के हमले के भय से इन पर वाहनों का आना-जाना बिल्कुल रूका हुआ है. |
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