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काठमांडू में यातायात ठप, सुरक्षा कड़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल की राजधानी काठमांडू में विद्रोहियों ने जगह-जगह अवरोध लगा दिए हैं जिससे वाहनों का शहर में आना-जाना प्रभावित हुआ है. इसके साथ ही सामानों के परिवहन में भी मुश्किलें पेश आ रही हैं. माओवादी विद्रोही अपनी माँगें मनवाने के लिए सरकार पर दबाव बनाने के मक़सद से ये कार्रवाई कर रहे हैं. काठमांडू को भारत से जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर पुलिस का ज़बरदस्त बंदोबस्त है. कुछ एंबुलेंसों और पर्यटकों की मोटर साइकिल छोड़कर और कोई वहाँ गाड़ी नहीं चल रही है. वैसे सेना के संरक्षण में कुछ बसें, मिनी बसें और ट्रक दोनों ओर चल रहे हैं. एक स्थानीय ब्रिगेड कमांडर ने कहा है कि जिसे भी सेना के संरक्षण की ज़रूरत होगी उसे वो उपलब्ध कराया जाएगा. उनका कहना था कि माओवादी लोगों को डराने के लिए इस तरह के क़दम उठा रहे हैं और कोई हिंसक वारदात नहीं हुई है. वैसे आने-जाने वाले ट्रक चालक डरे हुए हैं और कुछ ने तो इस डर से अपनी गाड़ियों की नंबर प्लेट भी छिपा ली हैं कि कहीं विद्रोही देख न लें. गाँव में रहने वाले एक व्यक्ति का कहना था कि वह सब्ज़ियाँ शहर में नहीं भेज पा रहा है और इससे सभी को परेशानी उठानी पड़ेगी ख़ासतौर पर ग़रीब लोगों को. माओवादी विद्रोहियों की माँगों में कैदी बनाए विद्रोहियों की रिहाई और विद्रोहियों को जान से मार देने की घटनाओं की जाँच शामिल है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इससे पहले माओवादी कई ज़िलों और शहरों की घेराबंदी कर चुके हैं लेकिन राजधानी में ऐसी कार्रवाई पहली बार हो रही है. सरकार कह चुकी है कि इस घेराबंदी को सफल नहीं होने दिया जाएगा. इससे पहले नेपाल में बड़ी कंपनियों को कारोबार बंद करने के लिए दी गई माओवादियों की समय सीमा मंगलवार को समाप्त हो गई. माओवादी विद्रोहियों ने अपनी माँगे मनवाने के लिए दबाव बढ़ाने के मक़सद से बड़े व्यवसायियों से कहा है कि वे अपना कामकाज अनिश्चित काल तक के लिए बंद कर दें. |
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