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नाबालिग़ नेपाली लड़कियाँ स्वदेश जाएँगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश की एक निचली अदालत ने एक सर्कस कंपनी में काम कर रही नौ नाबालिग़ नेपाली लड़कियों को उनके माता-पिता के पास वापस जाने की अनुमति दे दी है. राज्य प्रशासन ने इन लड़कियों को पिछले महीने नेपाल की सीमा से लगे गोंडा ज़िले में एक सर्कस से बरामद किया था. इनमें से अधिकतर गोरखपुर की सीमा से लगे नेपाल के बहिराहावन ज़िले की रहने वाली हैं. इन लड़कियों के माता-पिता ने उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच में एक याचिका दे कर इन्हें मुक्त किए जाने की मांग की थी. अदालत ने अपने निर्देश में कहा कि विदेशी नागरिकों के भी जीवन और आज़ादी के बुनियादी अधिकार हैं और बच्चों को नौकरी पर रखना ग़ैरक़ानूनी है. लड़कियों के माता-पिताओं ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि एक एजेंट ने उनसे कहा था कि उनकी बच्चियों को तन्ख़्वाह के रूप में भारी रक़म मिलेगी. बच्चों के लिए काम कर रही एक ग़ैर सरकारी संस्था के प्रतिनिधि रमाकांत राय का कहना है कि इन बच्चियों को अब दिल्ली ले जाया जाएगा जहाँ वे मानवाधिकार आयोग के सामने पेश होंगी. आयोग इन बच्चियों के उनको नौकरी देने वालों के हाथों कथित शोषण और यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच कर रहा है. |
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