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सोमवार, 20 अक्तूबर, 2003 को 10:09 GMT तक के समाचार
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अब कलाकारों की कमी से जूझते सर्कस

जंबो सर्कस
ज़्यादातर सर्कस घाटे में चल रहे हैं

सर्कस देखने वालों की कमी तो पुरानी बात हो गई लेकिन अब दिखाने वाले भी आगे नहीं आ रहे.

एक समय था जब सर्कस के अधिकांश कलाकार केरल के तलाचेरी ज़िले से आते थे.

मगर खाड़ी के देशों में रोज़ग़ार मिलने और शिक्षा के प्रसार की वजह से अब लोग सर्कस को रोज़ग़ार नहीं बना रहे हैं.

अब सर्कस चल रहे हैं बिहार, पश्चिम बंगाल और यहाँ तक कि नेपाल से आने वाले कलाकारों के भरोसे.

ये कलाकार भी ज़्यादातर ग़रीब और पिछड़े इलाक़ों से ही आते हैं.

इस बारे में नेपाल से आए रामन का कहना है, "पिछले कुछ वर्षों से नए कलाकारों का आना बंद सा हो गया है."

इसी तरह जंबो सर्कस के एक कर्मचारी ने बताया कि लोग सर्कस में मजबूरी में ही काम कर रहे हैं और अगर बाहर कहीं अच्छा काम मिले तो वे सर्कस तो छोड़ ही देंगे.

भारत में अब गिने-चुने सर्कस ही रह गए हैं, जिनमें जंबो, जेमिनी, रेमंड, नेशनल और न्यू ग्रैंड प्रमुख हैं.

लगातार घाटे की वजह से सर्कस दिन-ब-दिन बंद होते जा रहे हैं.

घटता मुनाफ़ा

एक सर्कस में लगभग 300 लोग काम करते हैं और हर रोज़ का ख़र्च लगभग 50,000 रुपए तक आता है.

जंबो सर्कस का कलाकार
नई पीढ़ी के इक्का-दुक्का कलाकार ही आगे आ रहे हैं

जंबो सर्कस के मैनेजर विनोद कुमार कहते हैं, "सर्कस की कमर तो तभी टूट गई थी जब सरकार ने जंगली जानवरों को सर्कस में लाने पर रोक लगा दी थी."

कुछ साल पहले सरकार ने भालू, चीता, शेर, बाघ और बंदरों को सर्कस में रखने पर रोक लगा दी थी.

विनोद कुमार के अनुसार इसी वजह से अब तो यहाँ तक की गाँवों में भी सर्कस देखने के लिए भीड़ नहीं जुटती.

सर्कस में भीड़ नहीं आने की वजह से कलाकारों में भी कोई रोमांच नहीं है और वे उदासीन हो गए हैं.

पिछले 27 वर्षों से सर्कस में जोकर बनकर लोगों का मन बहलाने में लगे बिहार के उस्मान ख़ान भी निराश हैं और उनका कहना है, "आधे से ज़्यादा ख़ाली तंबू में कला दिखाने में मज़ा नहीं आता."

उधर तीस वर्षों से सर्कस में काम कर रही सुशी माँ-बाप के मना करने के बावजूद सर्कस में आईं थीं.

मगर आज वह अपनी बेटी को पढ़ाने पर ज़ोर दे रही हैं.

उनका कहना है, "मैं अपने बच्चों को कभी सर्कस में नहीं डालूँगी."

शायद उत्साह में कमी की ही वजह से सर्कस में पिछले कई वर्षों से कुछ भी नया नहीं जुड़ा है.

यहाँ तक की सर्कस का सबसे महत्त्वपूर्ण हिस्सा, उसके कलाकार भी जल्दी से जल्दी किसी और पेशे में चले जाना चाहते हैं.

यही वजह है कि सर्कस के आने वाले दिनों पर किसी सुखद भविष्यवाणी की संभावना नहीं दिखती.

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