|
काठमांडू में अमरीकी दूतावास की गुहार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में अमरीकी दूतावास ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर दूतावास कर्मचारियों के रिश्तेदारों को अमरीका वापस भेजने के लिए अपनी सरकार से अनुमति माँगी है. साथ ही उन्होंने नेपाल में अमरीका के एक स्वयंसेवी कार्यक्रम को भी स्थगित करने का सुझाव दिया है. अमरीकी कर्मचारियों ने ये माँग पिछले शुक्रवार को काठमांडू स्थित अमरीकी सूचना केंद्र पर दो छोटे बम फेंके जाने की घटना के बाद की है. साथ ही अमरीका ने नेपाल को माओवादी समस्या को हल करने के लिए और 10लाख डॉलर देने की घोषणा की है. वापसी के लिए अनुमति काठमांडू में अभी अमरीकी दूतावास कर्मचारियों के लगभग 40 रिश्तेदार रह रहे हैं. इसके अतिरिक्त वहाँ अमरीकी स्वयंसेवी दल के भी 90 लोग रह रहे हैं. अमरीकी दूतावास की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है,"सुरक्षा की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अमरीकी राजदूत ने अमरीकी विदेश मंत्रालय से ये सिफ़ारिश की है कि काठमांडू से दूतावास कर्मचारियों के रिश्तेदारों को लौटने की अनुमति दी जाए". काठमांडू में शुक्रवार को अमरीकी सूचना केंद्र पर हुए बम हमलों के बाद अमरीकी दूतावास ने एक बयान में कहा था कि इन हमलों से ना केवल वहाँ लोगों के जीवन पर ख़तरा आया है बल्कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून का भी उल्लंघन हुआ है. वैसे अमरीकी सूचना केंद्र पर हमले की ज़िम्मेदारी किसी ने नहीं ली है. लेकिन माओवादी विद्रोही पहले से ही नेपाल सरकार को सैनिक और आर्थिक मदद देने के लिए अमरीका की आलोचना करते रहे हैं. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||