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माओवादियों ने पेशकश ठुकराई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में माओवादी विद्रोहियों ने प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की बातचीत के लिए अपील ठुकरा दी है. माओवादियों के प्रवक्ता कृष्ण बहादुर महारा ने बताया कि सरकार के पास न इसके लिए अधिकार है और न वह बातचीत के लिए गंभीर ही है. प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने बुधवार को अपील जारी करते हुए माओवादियों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था. माओवादियों ने पहले इस बात पर ज़ोर दिया था कि वे सीधे नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र से बातचीत करना चाहते हैं. प्रधानमंत्री की अपील पर माओवादियों के प्रवक्ता ने बातचीत का प्रस्ताव ठुकरा दिया.
एक प्राइवेट रेडियो स्टेशन पर प्रसारित इंटरव्यू में कृष्ण बहादुर महार ने आरोप लगाया कि सरकार विदेशी शक्तियों के हाथ में खेल रही है. माओवादी भारत और अमरीका द्वारा इस मामले में नेपाल सरकार को समर्थन दिए जाने से नाराज़ हैं. माओवादियों के प्रवक्ता ने कहा कि नेपाल सरकार शांति वार्ता की आड़ में उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई तेज़ करना चाहती है. पिछले साल अगस्त में सरकार और माओवादियों के बीच बातचीत टूट गई थी क्योंकि माओवादी एक संविधान सभा के गठन की माँग कर रहे थे जो देश का नया संविधान बनाए. बातचीत टूटने के बाद देश में हिंसा और बढ़ी है. आठ साल से चल रही माओवादी हिंसा में अभी तक नौ हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. |
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