|
नेपाल में मानवाधिकार पर चिंता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त लुईस आरबर ने कहा है कि नेपाल के नेता और सैनिक अधिकारी मानवाधिकार का हनन रोकने के लिए पर्याप्त क़दम नहीं उठा रहे हैं. नेपाल यात्रा पर गए लुईस आरबर ने नेपाल सरकार और माओवादी दोनों को ही इसके लिए दोषी ठहराया और कहा कि सभी की जवाबदेही तय की जानी चाहिए. नेपाल में माओवादियों की समस्या उभरने के बाद से नेपाल की यात्रा करने वाली वह पहली संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त हैं. नेपील प्रधानमंत्री देऊबा के साथ एक ही मंच पर बैठी लुईस आरबर का कहना था कि नेता और सैन्य अधिकारी दोनों ही ज्य़ादातर मानवाधिकारों की अनदेखी करते हैं और दूसरे पक्ष को मानवाधिकार उल्लंघन के लिए दोषी ठहरा देते हैं. उन्होंने कहा कि मानवाधिकार के अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के तहत ये सभी लोग मानवाधिकार उल्लंघन के लिए ज़िम्मेदार हैं. लुईस ने माओवादियों को बच्चों को भर्ती के लिए ज़िम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि बच्चों की ज़िंदगी नष्ट करने का इससे क्रूर उदाहरण और नहीं हो सकता. उन्होंने सरकार और माओवादियों दोनों से अपील की कि वे नेपाल मनवाधिकार संगठन द्वारा तैयार किए गए समझौते पर हस्ताक्षर करें. उनके इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार इस समझौते पर गंभीरता से विचार कर रही है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||