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देउबा ने साझा सरकार बनाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने देश में चार दलों की साझा सरकार के गठन की घोषणा की है. समझा जा रहा है कि उन्होंने ये क़दम देश में लंबे समय से जारी राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए उठाया है. देउबा ने वायदा किया है कि वे चरमपंथ की समस्या को सुलझाकर अगले वर्ष अप्रैल तक चुनाव करवाएंगे. मगर कुछ प्रमुख विपक्षी दल देउबा सरकार को मान्यता नहीं दे रहे और वे इसे असंवैधानिक बता रहे हैं. उन्होंने कहा है कि उनका विरोध जारी रहेगा जिसके कारण समझा जाता है कि गठबंधन सरकार बनाने के बावजूद देउबा की मुश्किल नहीं दूर होगी. गठबंधन सरकार शेर बहादुर देउबा ने अपनी सरकार में देश की सबसे बड़ी वामपंथी पार्टी एकीकृत मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट(एमाले), दक्षिणपंथी पार्टी राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और एक क्षेत्रीय दल नेपाल सद्भावना पार्टी को शामिल किया है. देउबा ख़ुद नेपाली कॉंग्रेस डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख हैं. नेपाल नरेश के दो मनोनीत सदस्यों को भी 31 सदस्यों वाले मंत्रिमंडल में जगह दी गई है. देउबा को पिछले महीने फिर से नेपाल का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था और तब से वहाँ बस तीन सदस्यों वाली सरकार सत्ता में थी. बर्ख़ास्तगी और नियुक्ति नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने दो साल पहले देउबा को अयोग्य घोषित करते हुए सत्ता से बेदखल कर दिया था. इसके बाद नेपाल नरेश ने दो प्रधानमंत्रियों को नियुक्त किया मगर उन्होंने गठबंधन सरकार बनाने में नाकाम रहने और हिंसा ना रोक पाने के बाद इस्तीफ़ा दे दिया. इसके बाद नेपाल नरेश को भारी विरोध झेलना पड़ा जिसके बाद पिछले महीने उन्होंने पुनः देउबा को प्रधानमंत्री बना दिया. नेपाल में पिछले दो साल से सुरक्षा की स्थिति के कारण चुनाव टाले जा रहे हैं. |
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