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नेपाल में बंद से जनजीवन प्रभावित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में विपक्षी राजनीतिक दलों के बंद के आह्वान के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो गया है. विपक्षी नेता पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों में हुई बढ़ोत्तरी का विरोध कर रहे हैं. विपक्षी राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों ने बंद की अनदेखी करने वाले लोगों से हाथपाई की और कुछ वाहनों को नुक़सान पहुँचाया. कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच भी झड़प हुई. पुलिस ने कुछ छात्र नेताओं को हिरासत में लिया है. लेकिन विपक्ष के बंद का व्यापक असर देखा जा रहा है. ज़्यादातर स्कूल, कॉलेज, फ़ैक्टरियाँ और बाज़ार बंद हैं. असर सड़कों पर इक्का-दुक्का वाहन की चलते दिख रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने कई जगह सड़कों पर रुकावटें खड़ी कर दीं हैं.
इन अवरोधों को हटाने की कोशिश कर रहे सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह से झड़पों की भी ख़बर है. इन राजनीतिक दलों का कहना है कि पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी अन्यायपूर्ण है और इससे आम आदमी पर बोझ बढ़ेगा. लेकिन सरकार का तर्क है कि तेल आपूर्ति करने वाली एजेंसी को दिवालिया बनने से रोकने के लिए क़ीमतों में बढ़ोत्तरी ज़रूरी थी. सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की क़ीमतों को ध्यान में रखकर ही क़ीमतों में बढ़ोत्तरी की गई है. लेकिन विपक्षी दल सरकार के तर्क से सहमत नहीं हैं. |
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