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माओवादियों ने भारतीय जवानों को छोड़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में माओवादी विद्रोहियों ने भारतीय सेना के उन 14 गोरखा सैनिकों को रिहा कर दिया है जिनका शुक्रवार को अपहरण कर लिया था. नेपाली मूल के ये सैनिक छुट्टियों पर अपने घर जा रहे थे. माओवादी विद्रोहियों ने आरोप लगाया था कि वे नेपाली सरकार के लिए जासूसी कर रहे थे. इन 14 गोरखा सैनिकों को रविवार को पश्चिमी नेपाल में कुछ पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में रिहा किया गया. बताया गया है कि सभी सैनिक सही सलामत हैं और अपने-अपने घरों को चले गए हैं. ये सैनिक शुक्रवार को छुट्टी बिताने नेपाल जा रहे थे कि माओवादी विद्रोहियों ने कैलाली ज़िले में राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक सीमा चौकी पर उन्हें रोक लिया और अपहरण कर लिया. विद्रोहियों ने उन सैनिकों से पूछताछ की लेकिन बाद में स्वीकार किया कि ऐसे कोई सबूत नहीं मिले कि वे नेपाली सेना के लिए जासूसी कर रहे थे. 1947 में स्वतंत्रता हासिल करने के बाद से ही भारतीय सेना में काफ़ी बड़ी संख्या में नेपाली गोरखा रहे हैं. इस वक़्त क़रीब 40 हज़ार गोरखा भारतीय सेना में हैं. महत्वपूर्ण घटना विशेषज्ञों ने सैनिकों के अपहरण की इस घटना को महत्वपूर्ण माना. भारतीय सेना के सेवानिवृत मेजर जनरल अशोक मेहता ने बीबीसी को बताया, "भारतीय सेना में गोरखा सैनिकों की 43 यूनिट है, और भारी संख्या में ये सैनिक छुट्टियों में नेपाल जाते हैं." उन्होंने कहा, "इससे पहले इस तरह की घटना नही हुई थी. इसके ज़रिए माओवादी भारत को संकेत देना चाहते हैं कि वो भी कुछ करने की स्थिति में है." उल्लेखनीय है कि बीते दिनों में माओवादी विद्रोही भारत और ब्रिटेन से नेपाली सेना को सहायता देना बंद करने की माँग कर चुके हैं. भारत नेपाली सेना को विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान में प्रशिक्षण और साजोसमान मुहैया कराता रहा है. वर्ष 2003 में विद्रोहियों ने एक भर्ती केंद्र से एक ब्रितानी सैनिक अधिकारी का अपहरण कर लिया था. हालाँकि बाद में उसे छोड़ दे दिया गया था. उल्लेखनीय है कि नेपाल के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में अवस्थित कैलाली ज़िले में माओवादियों की सक्रियता रही है. |
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