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विद्रोहियों की धमकी से काठमाँडू बंद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में माओवादी विद्रोहियों की चेतावनी के बाद राजधानी काठमाँडू गुरूवार को देश के बाक़ी हिस्सों से पूरी तरह कट गई. माओवादी विद्रोहियों ने ख़ासतौर से कारों और लारियों के चालकों को चेतावनी दी थी कि उन्होंने अगर इस चेतावनी की अनदेखी की तो उन्हें 'गंभीर परिणाम' भुगतने होंगे. काठमाँडू के आसपास सैकड़ों वाहन फँसे पड़े हैं और चालकों ने विद्रोहियों के इस बंद से प्रभावित इलाक़ों में जाने से इनकार कर दिया है. इस बार विद्रोही डर दिखाकर यह नाकेबंदी करवा रहे हैं. पहले वे ख़ुद मौजूद रहकर इस तरह का सड़क जाम या बंद किया करते थे. विद्रोहियों का कहना है कि वह यह कार्रवाई सुरक्षा बलों की ज़्यादतियों के विरोध में कर रहे हैं. बुधवार को विद्रोहियों ने काठमाँडू से क़रीब तीस मील दक्षिण पश्चिम में हेताउदा शहर में 18 ट्रकों को आग लगा दी थी. इस बीच नेपाल के दक्षिण पश्चिम हिस्से में सुरक्षा बलों और विद्रोहियों के बीच झड़पों में कम से कम दस लोग मारे गए हैं. इन तमाम हालात के बीच एक और घटना हुई कि नेपाल नरेश को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव का निधन होने की वजह से अपना दिल्ली दौरा स्थगित करना पड़ा है. संभावना व्यक्त की जा ही है कि नेपाल नरेश की भारत यात्रा के एजेंडे के दौरान माओवादी विद्रोहियों का मुद्दा छाया रहेगा. भारत सरकार नेपाल में जारी विद्रोही गतिविधियों से ख़ासी चिंतित है क्योंकि हाल के वर्षों में यह संघर्ष और तेज़ हो गया है. नेपाल सरकार ने विद्रोहियों के सामने बातचीत में शामिल होने के लिए 13 जनवरी तक की समय सीमा रखी है. पिछले साल जब से शांति वार्ता टूटी है तब से हिंसा में तेज़ी आई है. हाल के दिनों में विद्रोहियों और सुरक्षा बलों के बीच ख़ूनी झड़पें हुई हैं. |
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