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नेपालःगर्भपात करवानेवाली महिलाओं को माफ़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने देश में गर्भपात करवाने के जुर्म में जेल में बंद 12 महिला क़ैदियों को माफ़ी दे दी है. नेपाल में वर्ष 2002 तक गर्भपात अवैध माना जाता था और क़ानून का उल्लंघन करनेवालों को को तीन वर्ष से उम्र क़ैद तक की सज़ा दी जाती थी. मगर ये पाबंदी हट जाने के बाद से नेपाल में महिला अधिकारों की लड़ाई लड़नेवाले संगठन महिला बंदियों को रिहा किए जाने की माँग कर रहे थे. नेपाल सरकार ने दो वर्ष पहले गर्भपात पर लगी पाबंदी इसलिए हटाई क्योंकि ये देखा गया कि अक्सर महिलाओं को ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से गर्भपात करवाने के कारण जान गँवानी पड़ रही थी. नेपाल एशिया के ऐसे देशों में आता है जहाँ गर्भवती माताओं के मरने की दर सबसे अधिक समझी जाती है. समाचार एजेंसी एपी ने नेपाल के कारा विभाग की ओर से जारी एक बयान प्रकाशित किया है जिसमें लिखा है,"नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने 12 महिलाओं की बाक़ी सज़ा माफ़ कर दी है". माफ़ी की घोषणा सोमवार को नेपाल के संविधान दिवस के अवसर पर की गई. अधिकारियों के अनुसार 12 महिला क़ैदियों के अलावा संविधान दिवस के मौक़े पर पूरे नेपाल में लगभग 200 अन्य क़ैदियों को भी रिहा कर दिया गया. |
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