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अमरीका में महत्वपूर्ण गर्भपात क़ानून
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने एक महत्वपूर्ण क़ानून पर हस्ताक्षर किए हैं जिसके तहत बच्चे के जन्म से कुछ समय पहले कराए जाने वाले गर्भपात पर पाबंदी लग जाएगी. इसे 'आंशिक जन्म गर्भपात' कहा जाता है क्योंकि देर से होने वाले गर्भपात के समय तक भ्रूण काफ़ी विकसित हो चुका होता है. पिछले तीस वर्षों मे यह गर्भपात पर सबसे महत्वपूर्ण पाबंदी मानी जा रही है. राष्ट्रपति बुश ने इस क़ानून पर दस्तख़त तो कर दिए हैं लेकिन इसे लेकर अमरीका में भारी विरोध है और इसे क़ानूनी रुप से चुनौती देने की तैयारी की जा रही है. नए क़ानून के तहत 'आंशिक जन्म गर्भपात' पर पाबंदी लग जाएगी जिसके तहत गर्भ के पाँचवे या छठे महीने में भ्रूण को मारने से पहले उसके सिर को माँ के शरीर से बाहर निकाल लिया जाता है.
संसद ने इस विधेयक को पिछले महीने मंज़ूरी दे दी थी हालाँकि उन लोगों ने इस फ़ैसले का भारी विरोध किया था जो गर्भपात को व्यक्तिगत निर्णय मानते हैं. राष्ट्रपति बुश ने कहा, "पिछले कई वर्षों से उन बच्चों के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त हिंसा अपनाई जा रही है जो बस जन्म लेने की कगार पर हैं. और क़ानून इससे अपनी आँखें फेर लेता है". उन्होंने कहा, "आज कम से कम अमरीकी जनता और सरकार इस हिंसा का मुक़ाबला कर रही है और मासूम बच्चों की रक्षा के लिए आगे आ रही है". यह नया क़ानून अमरीका में 'जीवन-समर्थकों' के लिए भारी कामयाबी है जिनके समर्थन पर ही राष्ट्रपति पद पर जॉर्ज बुश की दोबारा जीतने की उम्मीदें टिकी हैं. वॉशिंगटन में बीबीसी संवाददाता रॉब वॉटसन का कहना है कि अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने 1973 में जबसे यह निर्देश दिया था कि महिलाओं को गर्भपात का सांविधानिक अधिकार है उसके बाद से देश के गर्भपात क़ानूनों में इतना भारी बदलाव नहीं देखा गया है. लेकिन कई महिला संगठनों और नागरिक अधिकारों के हिमायतियों ने अभी से इस नए क़ानून को चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है. |
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