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नेपाल में तिब्बती संगठनों के दफ़्तर बंद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल सरकार ने निर्वासित तिब्बतियों के दो प्रमुख संगठनों के काठमांडू स्थित कार्यालयों को बंद करने का आदेश दिया है. इनमें से एक संगठन तिब्बतियों के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा से जुड़ा है, जबकि दूसरा तिब्बती शरणार्थियों के लिए काम करता है. नेपाल में दलाई लामा के प्रतिनिधि वांग्चुक त्सेरिंग ने बीबीसी को बताया कि कार्यालय बंद करने की नोटिस गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने भेजी है. दोनों संगठनों पर पंजीकृत नहीं होने का आरोप लगाया गया है. अमरीका स्थित मानवाधिकार संस्था ह्यूमैन राइट्स वाच ने नेपाल सरकार से तिब्बतियों के कार्यालयों को फिर से खोलने की अनुमति देने की अपील की है. ह्यूमैन राइट्स वाच ने कहा है कि कार्यालयों के बंद होने का तिब्बती शरणार्थियों पर बहुत ही बुरा असर पड़ेगा. राजनीति काठमांडू से बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैविलैंड के अनुसार कार्यालयों को बंद करने के आदेश के पीछे राजनीति की बात साफ है. नेपाल में पिछले 45 वर्षों से दलाई लामा के प्रतिनिधि कार्यरत रहे हैं, लेकिन अब से पहले उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई. माना जाता है कि हाल के दिनों में चीन ने नेपाल पर तिब्बतियों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए दबाव बढ़ा दिया है. उल्लेखनीय है कि चीन ने 1950 में तिब्बत को अपने अधिकार में ले लिया था. एक अनुमान के अनुसार नेपाल में कोई 20 हज़ार तिब्बती शरणार्थी रहते हैं. |
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