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माओवादी हड़ताल का व्यापक असर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में सशस्त्र माओवादी विद्रोहियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल और सड़कों की नाकेबंदी से देश के कई हिस्सों में जन-जीवन प्रभावित हुआ है. लेकिन राजधानी काठमांडू में जन-जीवन सामान्य है. लेकिन काठमांडू को छोड़कर देश के अन्य हिस्सों में यातायात लगभग ठप हो गया है. व्यवसायिक प्रतिष्ठान और कारखाने भी बंद हैं. काठमांडू को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले राजमार्ग पर वाहन नज़र नहीं आ रहे. बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी के अनुसार सड़को पर पेड़ फेंक दिए हैं और कई जगह बारूदी सुरंगें लगा दी गई हैं. उनके अनुसार आने-जाने के लिए लोगों को केवल साइकल या रिक्शा इस्तेमाल करना पड़ रहा है. कई लोगों ने माओवादियों के डर से दुकानें बंद कर दी हैं.
राजा की सरकार का अधिकार क्षेत्र केवल बड़े शहरों तक ही सीमित है और शहरों से बाहर निकलते ही नष्ट या वीरान पुलिस चौकियाँ नज़र आती हैं. ग्रामीण इलाक़ो में दीवारों पर माओवादियों के लिखे नारे देखे जा सकते हैं. माओवादियों ने ये हड़ताल अपने संघर्ष के दसवें साल में प्रवेश करने पर बुलाई. माओवादियों के संघर्ष का मकसद राजशाही हटाकर कम्युनिस्ट राज कायम करना है. इसी मौके पर माओवादी नेपाल नरेश के सरकार बर्खास्त कर सत्ता अपने हाथ में लेने का भी विरोध कर रहे हैं. शनिवार को अनिश्चितकालीन नाकेबंदी की घोषणा की गई थी और तब से हज़ारों नेपाली नागरिक भारत की ओर पलायन कर चुके हैं. |
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