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माओवादियों से बातचीत के लिए टीम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल की नवनियुक्त सरकार ने माओवादी विद्रोहियों के साथ शांति वार्ताओं के लिए एक टीम का गठन किया है. नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने पिछले हफ्ते शेर बहादुर देउबा की सरकार को बर्खास्त कर अपने नेतृत्व में नई सरकार का गठन किया था. जिसके बाद यह माओवादियों के साथ शांति वार्ताओं की घोषणा की गई. ज्ञानेंद्र ने इसी आधार पर सरकार को बर्खास्त किया था कि सरकार माओवादी विद्रोह को समाप्त करने में विफल रही है. माओवादियों ने पूर्व में कहा था कि वो सिर्फ नेपाल नरेश से ही बातचीत करेंगे लेकिन अब उन्होंने नरेश द्वारा सत्ता हाथ में लेने का कड़ा विरोध किया है. इस बीच नेपाल के एक मानवाधिकार संगठन ने गुरुवार को प्रदर्शन करने की घोषणा की है. काठमांडू में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि गुरुवार को अगर रैली हुई तो नेपाल में नरेश विरोधी ये पहले प्रदर्शन होंगे. इधर नेपाल के अख़बारों ने सरकार पर दबाव बनाना शुरु कर दिया है कि उन पर लगाई गई सेंसरशिप हटाई जाए. नई सरकार ने मीडिया पर भारी सेंशरशिप लगा रखी है . फोन लाइनें काट दी गई हैं और अखबार में राजनीतिक टिप्पणियां छापने पर रोक है. |
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